राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस : मानसिक रोगों से बचने के लिये आत्मविश्वास बनाये रखें

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अमृत विचार, बांदा। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कार्य करने वाले चिकित्सकों एवं प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। अपने संबोधन में कहा कि मानसिक रोगों से बचाव के लिये जागरूकता बहुत जरूरी है। बचाव के लिये आत्मविश्वास …

अमृत विचार, बांदा। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कार्य करने वाले चिकित्सकों एवं प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। अपने संबोधन में कहा कि मानसिक रोगों से बचाव के लिये जागरूकता बहुत जरूरी है। बचाव के लिये आत्मविश्वास बनाये रखें।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य जन जागरूकता एवं उपचार शिविर का शुभारंभ जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने जिला चिकित्सालय में दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने कहा कि मानसिक रोग से बचने के लिए अपने परिवारजनों के साथ प्रेम एवं आत्मविश्वास को बनाए रखें और डिप्रेशन में न जाने दें, न अधिक चिंतन का मौका दें, हम साथ हैं का उनके साथ भाव रखें। कहा कि मानसिक रोगियों को स्वस्थ रहने और मस्त रहने की सलाह दें और उनके साथ प्रेम व सद्भाव रखें।

कहा कि जीवन महत्वपूर्ण है मानसिक उलझन होने पर घबराएं नहीं, चिकित्सक से संपर्क करें और इसका उपचार कराएं। मानसिक रोग होने पर किसी तरह की चिंता न करें। चिकित्सक से मिलकर अपनी पूरी परेशानी को बताएं। इसका इलाज बहुत आसान एवं संभव है। कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कार्य करने वाले चिकित्सकों एवं प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

डॉ.हरदयाल सिंह ने बताया कि 16 अक्टूबर तक राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता बनाए रखने को जागरूक किया जाएगा। डॉ.बीपी वर्मा ने बताया कि मानसिक रोगी में चिड़चिड़ापन एवं घबराहट आदि अधिक होती है। नकारात्मक विचार भी समय-समय पर आते रहते हैं। मानसिक रोग का इलाज जरूरी है।

बताया कि बहुत से मानसिक रोगी अपने मानसिक बीमारी को छुपाते हैं और इलाज नहीं कराते हैं, जिससे उन्हें बाद में अधिक समस्या हो जाती है। कार्यक्रम में डॉ.आरके गुप्ता, डॉ.अजय कुमार, डॉ.आरएन प्रसाद, डॉ.अर्चना भारती समेत रिजवाना, बांदा मेडिकल कॉलेज के पैरामेडिकल के छात्र-छात्राएं एवं बामदेव महाविद्यालय के छात्र तथा अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।

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