27th Convocation of SGPGI : प्रतिभा कितनी भी ऊंची हो पर मां बाप से ऊपर नहीं राज्यपाल ने युवा डॉक्टरों को दी ये सलाह

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लखनऊ। राजधानी के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) का 27वां दीक्षांत समारोह गुरुवार को आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री बृजेश पाठक, राज्य मंत्री, चिकित्सा शिक्षा मयंकेश्वर शरण सिंह और मुख्य सचिव, दुर्गा शंकर मिश्रा शामिल हुए। …

लखनऊ। राजधानी के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) का 27वां दीक्षांत समारोह गुरुवार को आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री बृजेश पाठक, राज्य मंत्री, चिकित्सा शिक्षा मयंकेश्वर शरण सिंह और मुख्य सचिव, दुर्गा शंकर मिश्रा शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मद्रास विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एसपी त्यागराजन ने मेडल और डिग्री पाने वाले युवा डॉक्टरों का हौसला बढ़ाया। समारोह में डीएम, एमसीएच, पीडीएफ,पीएचडी, एमडी, पीडीसीसी जैसे कोर्स में अच्छा प्रदर्शन करने वाले 215 छात्र हुये पुरस्कृत किए गये और साथ में तीन शिक्षकों को भी सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने युवा डॉक्टरों से कहा कि देश भर में बढ़ते हुए वृद्धा आश्रम की संख्या उन्हें चिंतित करती है और इसलिए उन्हें अपने अभिभावकों के कुशल क्षेम का पूरा ध्यान रखना है क्योंकि अभिभावकों के योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। राज्यपाल ने कहा कि युवा डॉक्टरों को समझाते हुए कहा कि हमारी कामयाबी के पीछे माता पिता का अहम योगदान होता है, इसलिए उनको कभी मत भूलना, राज्यपाल ने कहा कि प्रतिभा कितनी भी ऊपर हो लेकिन मां बाप से बड़ी कभी नहीं हो सकती है।

सातवां नहीं अब पहले नंबर की करें तैयारी
राज्यपाल ने कहा कि एसजीपीजीआई वह संस्थान है जहां दूर-दूर से मरीज आते हैं और इलाज करवाकर ठीक भी हो जाते हैं, अब इसे सातवें नंबर से पहले नंबर पर लाने का प्रयास करना होगा। उन्होंने नैक मूल्यांकन को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षण और प्रशिक्षण के क्षेत्र में की गए बहुमुखी सुधार सराहनीय है,। उन्होंने कहा की वर्तमान समय में गुणपरक स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा की दिशा में अनेक चुनौतियां हैं।आज चिकित्सा के क्षेत्र में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे रोबोटिक सर्जरी, बिगडेटा और डिजिटल तकनीकों का प्रयोग हो रहा है। चुनौती इस बात की है कि आज के चिकित्सक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से प्राप्त निर्णय को समझ सके और उन को रोगी सेवा के लिए लागू कर सकें।डॉक्टर से रोगी के साथ स्नेहिल संबंध होने आवश्यक है। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एकीकृत चिकित्सा और आयुष और प्राकृतिक चिकित्सा सहित सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने पर बल दिया।

राज्यपाल ने इस विश्वविद्यालय का दिया उदाहरण
राज्यपाल दीक्षांत के मौके पर डाक्टर टी एस अविनाशिलिंगम विश्वविद्यालय के शिक्षण और प्रशिक्षण प्रकिया की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि यहां देश के 14 राज्यों से महिलाएं अध्ययन के लिए आती हैं और 90% संकाय सदस्य भी महिलाएं ही हैं। यहां की 40% महिलाएं जो भी पढ़ने के लिए आती हैं, आदिवासी क्षेत्र की हैं। अविनाशिलिंगम विश्वविद्यालय में होने वाले शिक्षण प्रशिक्षण और शोध कार्यों की राज्यपाल महोदय ने भूरी भूरी प्रशंसा की और कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में नवाचार शोध के क्षेत्र में मार्गदर्शन करने वाले लोग होने चाहिए तभी विश्वविद्यालय शिक्षण प्रशिक्षण के अपने सच्चे लक्ष्य को पूर्ण कर पाएंगे।

पीजीआई टेलीमेडिसिन पहुंचेगी सभी 75 जिलों में
राज्यपाल ने कहा कि गांव में रहने वाले मरीजों को अब विशेषज्ञों से फोन पर इलाज मिलेगा। पीजीआई टेलीमेडिसिन को प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाना चाह रही है। जल्द ही इसमें कामयाबी मिलेगी। इसके बाद मरीजों को राजधानी विशेष तौर पर इलाज कराने के लिए नहीं आना होगा। घर के नजदीक ही उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह मिल सकेगी।

आयुष्मान के तहत इलाज कराने वालों में 50 फीसदी महिलाएं
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना का लाभ सबसे ज्यादा महिलाओं को मिला है। 50 प्रतिशत महिलाओं ने इस योजना का उपयोग किया है । देश में अब तक करीब तीन करोड़ 60 लाख गरीब मरीजों को योजना के तहत इलाज मिल चुका है। यूपी में 22 करोड़ की धनराशि से मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य महिलाओं की सेहत का खयाल रखें। क्योंकि महिलाएं दर्द सहती हैं। बीमारी होने के बावजूद घर में काम करती हैं। परिवार के दूसरों सदस्यों का खयाल रखती हैं।

डब्ल्यूएचओ के मानकों के आधार पर तैयार होंगे अस्पताल- बृजेश पाठक
प्रदेश के सरकारी अस्पताल व मेडिकल संस्थान विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ ) के मानकों के आधार पर तैयार किए जांएगे। इसमें मानकों के अनुसार सभी सुविधाएं दी जाएंगी। डॉक्टरों की संख्या के मुताबिक नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की जाएगी। ताकि मरीजों को और बेहतर इलाज मिल सके। यह बातें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कही। उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पीजीआई के डॉक्टरों पर उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के मरीजों को भरोसा बढ़ा है। यहां मरीज दुखी व पीड़ित होकर आता है। भर्ती होने के बाद ठीक होकर घर भी जाता है। मेडिकल संस्थानों को नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ के मानक के अनुसार तैनात किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बीते दिनों 4000 नर्सों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें करीब 2200 नर्सिंग अभ्यर्थी ही परीक्षा पास कर पाएं। यह चिंता का विषय है। इसलिए नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों की गुणवत्ता बढ़ाई जाएगी। छह स्तर पर नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों की स्क्रीनिंग होंगी।

इनको मिला विशेष पुरस्कार
1- प्रो. आरके शर्मा बेस्ट एमसीएच स्टूडेंट एवार्ड- डा. तंबोली जाइन इकबाल
2- प्रो. आर के शर्मा बेस्ट डीएम स्टूडेंट एवार्ड- डा. रूद्रापन चटर्जी
3- प्रो.एसआर नायक बेस्ट रिसर्चर एवार्ड- डा. अमित गोयल
4- प्रो. एसएस अग्रवाल एक्सीलेंस इन रिसर्च- डा. पारिजात राम त्रिपाठी
5-प्रो. एसआर नायक बेस्ट रिसर्चर अवार्ड- डा. रोहित सिन्हा

212 छात्रों को दी गई डिग्री
डीएम-46
एमसीएच 20
एमडी-38
पीएचडी- 8
पीडीसीसी-37
एमएचए- 5
एमएससी-14
बीएससी नर्सिंग-40

 

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