अयोध्या: खैरात, जकात व चंदे के फंड से चल रहे मदरसे, सर्वे में हुआ खुलासा

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अयोध्या। जिले में बिना मान्यता के चलते पाये गये 55 मदरसों की आय का कोई स्थायी जरिया नहीं है। इन मदरसों को खैरात, जकात और चंदे से प्राप्त फंड से संचालित किया जा रहा है। फिलहाल इन गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की आय का स्रोत यही है। इस बात की पुष्टि तहसीलों में गैर मान्यता …

अयोध्या। जिले में बिना मान्यता के चलते पाये गये 55 मदरसों की आय का कोई स्थायी जरिया नहीं है। इन मदरसों को खैरात, जकात और चंदे से प्राप्त फंड से संचालित किया जा रहा है। फिलहाल इन गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की आय का स्रोत यही है। इस बात की पुष्टि तहसीलों में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे की रिपोर्ट से होती है।

शासन के निर्देश पर विगत दिनों जनपद की पांचों तहसीलों में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की खोजबीन के बाद 55 मदरसे बिना मान्यता के संचालित होते पाये गए हैं। सबसे अधिक 21 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे रुदौली तहसील में मिले हैं। दूसरे स्थान पर मिल्कीपुर तहसील है जहां 10 मदरसों को बिना मान्यता प्राप्त पाया गया है। इसके अलावा सोहावल व सदर तहसील क्षेत्र में 9-9 और बीकापुर तहसील में कुल 6 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त पाये गये हैं।

गैर मान्यता प्राप्त इन 55 मदरसों की जांच रिपोर्ट को 25 अक्टूबर तक जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है। गैर मान्यता प्राप्त मदरसों में बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों के वेतन आदि पर आने वाला सभी खर्च मदरसे को देश-विदेश से प्राप्त होने वाली जकात, खैरात व चंदा से किया जाता है। लेकिन इन गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को मिलने वाले फंड का माध्यम नकद है या अन्य स्रोत, यह जानकारी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को भी नहीं है।

अब सवाल यह उठता है कि अगर मदरसों को जकात या खैरात के नाम से सहायता की जाती है तो उस दान राशि देने का माध्यम विधिक है या अन्य स्रोत, इसका जवाब भी मदरसा संचालकों के पास नहीं है। फिलहाल यह मदरसे संचालकों के निजी भूमि-भवन पर या फिर किराये के भवन में चलाये जा रहे हैं। यहां उर्दू, अरबी, कुरान, हदीस के साथ आधुनिक विषय के रूप में हिन्दी, अंग्रेजी, गणित व साइंस भी पढ़ाई जाती है।

कई गैर मान्यता प्राप्त मदरसों द्वारा मान्यता के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में आवेदन भी कर रखा है। लेकिन उन्हें अभी मान्यता प्राप्त नहीं हुई है। इस बारे में पूछने पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अमित कुमार सिंह ने कहा कि वह अवकाश पर हैं, वक्फ इंस्पेक्टर से बात करें। वक्फ इंस्पेक्टर रमेश चन्द्र से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ बताता रहा।

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