अयोध्या में सत्ता पक्ष के लिए निकाय चुनाव बहुत आसान नहीं…

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इंदुभूषण पांडेय,अमृत विचार, अयोध्या। प्रदेश की भाजपा सरकार ने अयोध्या जिले में तीन नई नगर पंचायतों का सृजन तो कर दिया है लेकिन इसके बावजूद निकाय चुनाव में उसके लिए नगरीय निकाय चुनाव फतह की डगर बहुत आसान नहीं रहने वाली है। अब तक जिले में अयोध्या नगर निगम के अलावा एक नगर पालिका और …

इंदुभूषण पांडेय,अमृत विचार, अयोध्या। प्रदेश की भाजपा सरकार ने अयोध्या जिले में तीन नई नगर पंचायतों का सृजन तो कर दिया है लेकिन इसके बावजूद निकाय चुनाव में उसके लिए नगरीय निकाय चुनाव फतह की डगर बहुत आसान नहीं रहने वाली है। अब तक जिले में अयोध्या नगर निगम के अलावा एक नगर पालिका और तीन नगर पंचायतें थीं।

जिनमें नगर निगम को छोड़कर मौजूदा समय बाकी चारों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। एक तरह से कहा जाए तो महानगर छोड़कर बाकी जिले में निकायों में सपा की मजबूत पैठ बीते चुनाव में तब भी बन गई थी, जब जिले की सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा था।

अब आगामी चुनाव में जिले में एक नगर निगम, एक नगर पालिका व छह नगर पंचायतें हो गई हैं। खास बात यह है कि यह चुनाव तब होने जा रहा है, जब जिले की दो विधानसभा सीटों क्रमश: मिल्कीपुर और गोसाईगंज में समाजवादी पार्टी का कब्जा हो चुका है। एक तरह से भाजपा बीते विधान सभा चुनाव में भी जिले में कमजोर हुई है। इस तरह से आगामी शहर निकाय चुनाव में भाजपा के सामने चुनौतियां और कड़ी है।

मौजूदा समय में रुदौली नगर पालिका, भदरसा नगर पंचायत, गोसाईगंज नगर पंचायत व बीकापुर नगर पंचायत समाजवादी पार्टी के कब्जे में है। सिर्फ नगर निगम अयोध्या पर भाजपा काबिज है, जिसके प्रथम मेयर ऋषिकेश उपाध्याय हैं। नगर निगम में हालिया दिनों 41 और गांवों को जोड़कर सीमा विस्तार कर दिया गया है। यह नए जुड़े 41 गांव भी भाजपा के लिए कठिन चुनौती बनने वाले हैं।

इधर, प्रदेश सरकार ने कुमारगंज, सुचितागंज और कामाख्या धाम के नाम से नई नगर पंचायतों का गठन किया है। यह सब इलाके अब तक गैर शहरी रहे हैं। नई नगर पंचायतों के गठन में भी बड़ी खींचतान रही है, जिसे चुनाव में जमीन पर संभाल पाना सत्ता पक्ष के लिए एक चुनौती होगी। मौजूदा समय शहरी निकाय चुनाव को लेकर भाजपा में खेमेबाजी भी खूब देखी जा रही है।

नगर निगम में ही भाजपा से दर्जनभर दावेदार जगह-जगह होर्डिंग लगाए घूम रहे हैं। वहीं समाजवादी पार्टी बगैर किसी शोर शराबे के निकाय चुनाव का मैदान मारने की जुगत में बहुत सलीके से जुट गई है। मौजूदा माहौल को देखते हुए नगर निगम में भी सपा के कई दावेदार टिकट दावेदारी में जुटे हैं। नगरीय निकायों में नागरिक सुविधाओं का विशेष न बढ़ना और टैक्स की बड़ी बढ़ोतरी भी मौजूदा चुनाव में अहम मुद्दा बनने वाली है।

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