सांसत में कांग्रेस

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Edited By Amrit Vichar
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राजस्थान सरकार पर आए सकट के बादल छंट गए है। पर राजनीतिक अनिश्चितता बरकरार है। राजद्रोह के आरोपों के तहत दायर एक शिकायत की जांच के लिए पुलिस द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दिल्ली पहुंचे। लगता है उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट इंतजार के मूड में नहीं थे। इसीलिए उन्होंने सरकार …

राजस्थान सरकार पर आए सकट के बादल छंट गए है। पर राजनीतिक अनिश्चितता बरकरार है। राजद्रोह के आरोपों के तहत दायर एक शिकायत की जांच के लिए पुलिस द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दिल्ली पहुंचे। लगता है उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट इंतजार के मूड में नहीं थे। इसीलिए उन्होंने सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की। पर उनकी गणना गलत साबित हुई।

मुख्यमंत्री गहलोत ने सोमवार को विधायक दल की बैठक में अपनी ताकत दिखाई। विधायकों को एकजुट रखने के लिए रिसार्ट पॉलिटिक्स का खेल अभी जारी है। हालांकि व्हिप जारी होने के बावजूद पायलट और उनके समर्थक 18 विधायक बैठक से गायब थे। कांग्रेस हाईकमान को चेतावनी देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि तब कार्यवाही करोगे जब घोड़े अस्पबल से बाहर भाग चुके होंगे। पलट कर भाजपा नेता ने कहा कि घोड़े वहीं भागते हैं जहां हरियाली होती है।

यह भी भाजपा कह रही है कि कांग्रेस का अपना घर ठीक नहीं और दोष हम पर लगाया जाता है। हम कौन सरकार गिराने वाले ? सच है । कांग्रेस की सरकार कांग्रेस वाले ही गिराते हैं। किसी दूसरे की जरुरत ही नहीं पड़ती। भाजपा तो सिर्फ सहारा लगाती है या आश्रय देती है। मध्यप्रदेश इसका उदाहरण है। इस बार तो सीधे-सीधे मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री टक्कर में रहे। सचिन ने कह भी दिया था कि राजस्थान सरकार अल्पमत में है। जो नहीं कहा वह यह कि भाजपा के सम्पर्क में हूं।

उधर भाजपा कब से राजस्थान को भगवा रंग में रंगने को तैयार थी और सचिन पायलट की उपेक्षा करने से सरकार संकट में नजर आई। यह भी बात निकल रही है कि सचिन को अध्यक्ष पद से भी हटाये जाने की चाल चली जाने वाली थी। यह कह कर कि एक व्यक्ति और दो पद कैसे? इस तरह सचिन समय रहते चौकन्ने हो गये और अशोक गहलोत ने अपने ही उपमुख्यमंत्री को सरकार अस्थिर करने वाला घोषित कर दिया और सचिन इसे साबित करने चल पड़े। बताया गया कि पायलट को शांत कराने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने हस्तक्षेप किया है।

सच है कांग्रेस हाई कमान बहुत देर बाद जागती है तब तक विरोधी अपनी चाल चल चुके होते हैं। जल्द फैसला न करना और समय रहते संकट को न पहचानना राजनीति में बहुत महंगा पड़ता है। कांग्रेस का युवा नेताओं की उपेक्षा करना भी ऐसी ही भूल है। गोवा में ऐसे ही सरकार बनाने से चूके थे।