बरेली: ढाई करोड़ के बकायेदार पर अफसर मेहरबान, नहीं हो रही कार्रवाई

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बरेली, अमृत विचार। नगर निगम में टैक्स विभाग के अफसरों की मनमानी ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। कार्यकारिणी की बैठक में मेयर डा. उमेश गौतम भी टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली पर अंगुली उठा चुके हैं। अफसरों द्वारा टैक्स वसूली में भेदभाव बरतने का एक मामला सामने आया है। यह भी पढ़ें- त्योहारों …

बरेली, अमृत विचार। नगर निगम में टैक्स विभाग के अफसरों की मनमानी ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। कार्यकारिणी की बैठक में मेयर डा. उमेश गौतम भी टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली पर अंगुली उठा चुके हैं। अफसरों द्वारा टैक्स वसूली में भेदभाव बरतने का एक मामला सामने आया है।

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सिविल लाइंस की एक फर्म पर ढाई करोड़ से ज्यादा का बकाया है। वर्ष 2018 से अफसरों ने इस फर्म से बकाया वसूलने का सक्रिय प्रयास तक नहीं किया। यही वजह रही कि फर्म चल रही और अब तक बकाया 2 करोड़ 62 लाख 70 हजार 399 रुपये है। इसमें दिसंबर 2018 में फर्म ने टैक्स बकाये के रूप में 3 लाख रुपये जमा किए थे।

यह प्रकरण जोन- 2 का है। नगर निगम के चार जोन में सबसे ज्यादा बकाया इसी जोन में बताया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अफसर बकाये को कम करने के लिए छोटे व्यापारियों पर ही शिकंजा कस रहे हैं। सिविल लाइंस में एक भवन पर वर्ष 2018 में तीन लाख जमा करने के बाद अब 2 करोड़ 59 लाख 70 हजार 398 रुपया बकाया चल रहा है। बिल की पिन 058115 है और नगर निगम के स्टेटमेंट में यही दर्शाया गया है कि फर्म की ओर से अब तक एक बार ही टैक्स जमा किया गया है। वहीं, टैक्स विभाग के अफसरों पर जनप्रतिनिधि भी मेहरबान हैं।

जोन- 2 के अफसरों की कार्यप्रणाली से आहत प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के नेता सतीश अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि टैक्स विभाग में घपले ही घपले हैं लेकिन उच्चाधिकारी जानते हुए भी मौन हैं। बताया कि जोन-2 में 19 अक्टूबर को कॉलेज रोड की छह दुकानें सील की गईं। उनकी दुकान पर नोटिस 1 लाख 7 हजार बकाया का लगाया गया। कार्यालय जाकर पता किया तो बताया गया कि नोटिस गलत लग गया है। बकाया 13 लाख है। यह भी बताया कि कॉलेज रोड में 180 गज के भवन का 2006 में बंटवारा हो गया।

तब निगम में इसकी दो फाइलें चल रही थीं, लेकिन अब इसकी चार फाइलें चल रही हैं। उनमें भी उटपटांग टैक्स लगाया गया है। सतीश ने बताया कि उन्होंने नगर निगम में अपनी संपत्ति अलग करने के लिए तीन आवेदन दिए हैं लेकिन वर्षों से उन पर कोई सुनवाई नहीं हुई। गुरुवार को वह नगर आयुक्त से मिलने का प्रयास करते रहे लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। अब दिवाली बाद उनसे मुलाकात कर अफसरों की कारगुजारियों से अवगत कराया जाएगा। इस बारे में नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स से बात करनी चाही, लेकिन नहीं हो सकी।

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