हमीरपुर: छह प्रधानों पर लटकी कार्रवाई की तलवार, डीएम ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

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हमीरपुर, अमृत विचार। अन्ना मवेशियों को गोशाला में बंद करने से ज्यादातर प्रधान कोताही बरत रहे हैं। इस मामले में आए दिन किसान अन्ना मवेशियों से फसल चर जाने की शिकायतें करते देखे जा रहे हैं। पिछले सप्ताह डीएम ने बीडीओ और पशुपालन विभाग के चिकित्सकों से जांच कराई तो छह ग्राम पंचायतों के प्रधान …

हमीरपुर, अमृत विचार। अन्ना मवेशियों को गोशाला में बंद करने से ज्यादातर प्रधान कोताही बरत रहे हैं। इस मामले में आए दिन किसान अन्ना मवेशियों से फसल चर जाने की शिकायतें करते देखे जा रहे हैं। पिछले सप्ताह डीएम ने बीडीओ और पशुपालन विभाग के चिकित्सकों से जांच कराई तो छह ग्राम पंचायतों के प्रधान गोशालाओं के प्रति लापरवाह पाए गए।

वहीं शासन से मवेशियों के लिए मिलने वाले बजट को ख़र्च कर रहे हैं। अधिकारियों की आख्या पर डीएम ने छह प्रधानों को करण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

पशु चिकित्साधिकारी व बीडीओ ने पिछले 12 अक्तूबर को भेजी आख्या में कहा है कि भ्रमण के समय मुस्करा ब्लाक के निवादा प्रधान गिरजा देवी, बिवांर प्रधान रोशनी, मुस्करा प्रधान महेंद्र प्रताप, लोदीपुर जलालपुर के प्रधान सिद्ध गोपाल, ब्लाक कुरारा के कुसमरा प्रधान अरुण सिंह यादव व सुमेरपुर ब्लाक के छानीखुर्द प्रधान श्याम कुंवर गोशालाओं में मवेशी बंद करने में कोताही बरत रहे हैं। निरीक्षण में मवेशी नहीं मिले।

जबकि सड़क पर बैठे व विचरण करते पाए गए, जिससे निराश्रित गोवंश के झुंड के रोड पर बैठने से जनहानि एवं पशुहानि होने की प्रबल संभावना रहती है। इस पर जिलाधिकारी डा चंद्र भूषण ने गोवंश संरक्षण में सहयोग न करने पर अत्यंत खेदजनक माना है। उन्होंने प्रधानों भेजें कारण बताओ नोटिस में कहा है कि प्रतीत होता है कि प्रधान गोवंश संरक्षण कर उनके खाने-पीने आदि की व्यवस्था नहीं रहे हैं। न ही निराश्रित पशुओं का संरक्षण गोशालाओं में किया जा रहा है। जिससे मवेशी दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। जबकि शासन स्तर लगातार समीक्षा हो रही है।

प्रधानों व सचिवों को लगातार
निर्देशित किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में यदि किसी भी गोशाला के चरवाहे का मानदेय का भुगतान किया जाता है तो गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जाएगी। तथा संबंधित की विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण तीन दिवस के अंदर डीपीआरओ कार्यालय में प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही ग्राम पंचायतों के निराश्रित गोवंशों को गोशालाओं में बंद करने को निर्देशित किया है। अन्यथा की दशा में आपके विरुद्ध पंचायती अधिनियम 1947 की धारा 95 (1) (छ) के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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