जलालाबाद: संक्रमित मासूम के साथ रहने अस्पताल पहुंचा पिता
मुकीम हुसैन, जलालाबाद। ह्रदय और अंतरात्मा को झकझोरने वाली मासूम की चीखें अमृत विचार के माध्यम से बुधवार देर रात शाहजहांपुर जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह के कानों तक पहुंची। अमृत विचार ने सबसे पहले संक्रमित मासूम की खबर को अपनी वेबसाइट पर चला कर जिले की जनता और प्रशासन को बच्चे की वेदना को समझने …
मुकीम हुसैन, जलालाबाद। ह्रदय और अंतरात्मा को झकझोरने वाली मासूम की चीखें अमृत विचार के माध्यम से बुधवार देर रात शाहजहांपुर जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह के कानों तक पहुंची। अमृत विचार ने सबसे पहले संक्रमित मासूम की खबर को अपनी वेबसाइट पर चला कर जिले की जनता और प्रशासन को बच्चे की वेदना को समझने पर मजबूर कर दिया।
खबर चलने के कुछ ही मिनटों में सैंकड़ों व्यूज़ होने पर जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने आनन फानन में स्वास्थ्य विभाग को बच्चे के साथ उसके किसी परिजन को विशेष प्रतिबंधो शर्तो के साथ रोकने की अनुमति प्रदान की खबर चलने के तकरीबन दो घण्टे बाद मासूम बच्चे के पास उसका पिता पहुंच गया।
दरअसल बुधवार की दोपहर शाहजहांपुर के खुदागंज थानाक्षेत्र के गांव सकतिया बहादुरपुर निवासी चार वर्षीय मासूम में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा शासन द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुपालन में बच्चे को एल1 अस्पताल में आइसोलेट करना पड़ा। चूंकि परिवार में एक मात्र मासूम बच्चा ही संक्रमित था जिस कारण स्वास्थ्य विभाग कर्मियों द्वारा उसे अकेले ही अस्पताल ले जाया गया।
घर से अस्पताल ले जाते समय बच्चे के परिजनों के अलावा ग्रामीण व स्वयं स्वास्थ्यकर्मी भी बच्चे की दशा देखकर रुआंसे हो गए थे। जैसे तैसे बच्चे को अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया, मगर अस्पताल पहुंचने के बाद खुद को अजनबियों के बीच पाकर बच्चा घबरा गया और उसने चीखें मार मार कर रोना शुरू कर दिया।
बच्चे की करुण वेदना सुन अस्पताल में आइसोलेट हर संक्रमित बच्चे को लेकर परेशान हो गया और सभी ने अपने अपने तरीके से बच्चे को शांत कराने का प्रयास भी किया मगर बच्चे को तो बस माँ के पास जाना था। देर शाम तक जब बच्चा मां की रट लगाते लगाते बिना कुछ खाये ही सो गया तो सभी मे अपने स्तर से बच्चे को माता पिता से मिलाने के लिए प्रयास शुरू किए।
थोड़ी ही देर में बच्चा फिर से मम्मी मम्मी चीखता हुआ रोने लगा लोगो ने उसे कुछ खिलाने की कोशिश भी की मगर असफल रहे तो बच्चे की वीडियो बना कर मीडियाकर्मियों से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद अमृत विचार ने सबसे पहले मामले को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया और अपनी वेबसाइट पर खबर “कोरोना से नहीं मां से बिछड़ कर मर जायेगा मासूम” को प्रमुखता से चलाया खबर चलते ही जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने खबर का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को बच्चे के साथ उसके किसी परिजन को साथ रखने की अनुमति दे दी।
आदेश मिलते ही तत्काल स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में एम्बुलेंस भेज कर बच्चे के पिता को शाहजहांपुर के बरेली मोड़ स्थित एल1 अस्पताल लाया गया।
अब पिता-पुत्र को अलग-अलग किया गया आइसोलेट
बुधवार देर रात जब पिता अपने पुत्र के पास पहुंचा तो बेटा सो रहा था जाते ही पिता ने अपने पुत्र को गले से लगा लिया तो उसकी भी आंख खुल गई। खुद को पिता की गोद मे देख बच्चा फिर रोने लगा तो पिता ने समझा बुझाकर चुप करा लिया। उसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा उसे प्रथम तल पर सबसे अलग आइसोलेट कर दिया गया है बच्चा और पिता दोनो ही अब एक दूसरे के साथ खुश हैं।
कैसे हुआ संक्रमित नहीं मालूम: पिता
बच्चे के पिता का कहना है कि वह अपनी पत्नी व अन्य तीन बच्चो के साथ गोरखपुर में रहता था जबकि उसका संक्रमित पुत्र होली से पहले का गांव में दादी के साथ था। वह गोरखपुर में ईंट भट्ठा पर ईंट पाथने का काम करता है। 17 जून को वह अपनी पत्नी व बच्चो के साथ घर लौटा तो प्रशासन द्वारा सभी का कोरोना टेस्ट कराया गया था. जिसमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। उसके बाद 13 जुलाई को दादी के साथ रह रहे पुत्र का टेस्ट हुआ जिसकी रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है उसे नही पता कि बच्चे में संक्रमण कैसे पहुंचा।
दुधमुंहे की खातिर मन मसोस रही मां
संक्रमित मासूम के पिता ने बताया कि उसके एक छह माह का दुधमुहां बच्चा भी है जिसे हर वक़्त मां की गोद और दूध की आवश्यकता है। अस्पताल से बच्चे के पास जाने की छूट मिलने पर उसकी मां झट से आंसू पोछ अपने बेटे के पास जाने की तैयारी करने लगी तो उसने अपनी पत्नी को समझाया कि संक्रमित पुत्र के पास वह खुद चला जायेगा। वहां ले जाने से उसे भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। काफी समझाने के बाद बमुश्किल वह मानी मां का कहना था कि एक बच्चे के लिए एक दूसरा बच्चा मैं कैसे छोड़ दूं। परिजनों के समझाने पर वह मन मसोस कर रह गई।
