मुरादाबाद : महिला थानेदार की खामोशी से कटघरे में खाकी की कार्यप्रणाली, जानें पूरा मामला
श्रीशचंद्र मिश्र, मुरादाबाद। मौन किस हद तक खतरनाक हो सकता है, यह महिला थानेदार से बेहतर शायद ही कोई समझ सके। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने थाने में घुसकर महिला थानेदार से रंगदारी के रूप में 5,000 रुपये की मांग की। लेकिन वह मौन रहीं। थानेदार के साथ ही पुलिस की किरकिरी …
श्रीशचंद्र मिश्र, मुरादाबाद। मौन किस हद तक खतरनाक हो सकता है, यह महिला थानेदार से बेहतर शायद ही कोई समझ सके। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने थाने में घुसकर महिला थानेदार से रंगदारी के रूप में 5,000 रुपये की मांग की। लेकिन वह मौन रहीं। थानेदार के साथ ही पुलिस की किरकिरी हुई। अगर समय रहते सजग हो जातीं तो संभव था कि खाकी की साख व गरिमा पर आंच नहीं आती।
महिला थाना प्रभारी दीपा त्यागी द्वारा सिविल लाइंस थाने में दी गई तहरीर पर गौर करना मौजू है। पीड़ित इंस्पेक्टर ने बताया है कि आरोपी परवेज अंसारी 20 अक्टूबर को थाने पहुंचा। तब वहां हेड कांस्टेबल जुनैद व दिग्विजय भी मौजूद थे। कार्यालय में बैठकर महिला निरीक्षक अपना कामकाज निपटा रहीं थीं। दुस्साहस की पराकाष्ठा पार करते हुए आरोपी ने महिला थानेदार को बदनाम करने की धमकी दी। यहां तक कहा कि रकम न मिलने पर वीडियो बनाकर वह बदनाम कर देगा। सात दिन बाद 27 अक्टूबर को थानेदार की वीडियो सोशल मीडिया की सुर्खी बन गई। तब निरीक्षक की नींद टूटी और आरोपी द्वारा सात दिन पहले रंगदारी मांगे जाने की घटना याद आई।
अब सवाल यह है कि यदि थाने में घुसकर महिला इंस्पेक्टर से रंगदारी वसूलने की कोशिश हुई, फिर पुलिस गंभीर अपराध पर सात दिनों तक मौन क्यों रही? महिला इंस्पेक्टर वीडियो वायरल होने का इंतजार क्यों करती रहीं? क्या उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को समय रहते रंगदारी मांगे जाने की घटना की जानकारी दी? यदि नहीं तो क्यों? उच्चाधिकारियों को यदि समय रहते घटना का पता चल गया तो वह चुप्पी साध कर क्यों बैठे रहे? वायरल वीडियो की मदद से आरोपी यदि मुरादाबाद पुलिस की छवि धूमिल करने में सफल रहा, तो इसका एक मात्र गुनहगार वह खामोशी है, जिसने जानबूझ कर पर्दा डाला गया।
एसपी सिटी तक ने कबूला कि आरोपी ने महिला थानेदार से रंगदारी मांगने के आरोपों को स्वीकारा है। रंगदारी मांगने के एक सप्ताह बाद भी आरोपी पुलिस अधिकारियों के बीच घूमता रहा। लेकिन किसी को महिला थाने में रंगदारी मांगे जाने की घटना की भनक तक नहीं लगी। इससे पुलिस के सूचना तंत्र की
सक्रियता व आपसी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा होता है।
महिला थानेदार की वीडियो वायरल करने का आरोपी गिरफ्तार
महिला थानेदार दीपा त्यागी की रील बनाकर रंगदारी मांगने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने के आरोपी को शुक्रवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गंभीर आरोपों से घिरे कथित पत्रकार व यूट्यूबर को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। एसपी सिटी अखिलेश भदौरिया ने बताया कि महिला थाना प्रभारी ने सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी। बताया कि परवेज अंसारी नाम का एक व्यक्ति काफी समय से थाने में आता-जाता है।
खुद को पत्रकार बताने वाले युवक ने महिला थाना प्रभारी की तब वीडियो बनानी ली, जब वह थाना कार्यालय के सीसीटीएनएस कक्ष से वापस अपने थाना प्रभारी निरीक्षक कक्ष की ओर जा रही थीं। 20 अक्टूबर को वह अपने कार्यालय में मौजूद थीं। तभी आरोपी ने धमकी देते हुए 5,000 रुपये की मांग की। कहा कि रुपये नहीं मिले तो रील बनाकर वीडियो वायरल कर दूंगा। महिला थानेदार ने रुपये देने से इनकार कर दिया। 27 अक्टूबर को उन्हें पता चला कि परवेज अंसारी व उसके साथियों ने एडिट वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर अपलोड की है। वर्दी में पुलिस अधिकारी का टिकटाक वीडियो वायरल करना पूर्णतया प्रतिबंधित व गैरकानूनी है। वीडियो वायरल होने से पुलिस व महिला थानेदार की छवि धूमिल हुई है। तहरीर के आधार पर परवेज अंसारी व उसके अन्य साथियों के खिलाफ गंभीर धारा में केस दर्ज किया। थाना प्रभारी गजेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी को कोर्ट ने जेल भेज दिया है।
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