छठ पूजा : आज डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी महिलाएं

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मुरादाबाद,अमृत विचार। छठ महापर्व के दूसरे दिन की शुरुआत खरना के साथ हुई। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो गया। शनिवार शाम को लौकी की सब्जी, नया गुड़, मेवा और गाय के दूध से खीर बनाई। इसके बाद छठ मैया का आह्वान करते हुए भोग लगाया। पूजा के लिए कृत्रिम जलाशय …

मुरादाबाद,अमृत विचार। छठ महापर्व के दूसरे दिन की शुरुआत खरना के साथ हुई। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो गया। शनिवार शाम को लौकी की सब्जी, नया गुड़, मेवा और गाय के दूध से खीर बनाई। इसके बाद छठ मैया का आह्वान करते हुए भोग लगाया। पूजा के लिए कृत्रिम जलाशय बनाने, साफ-सफाई और सेनिटाइजेशन किया गया। नगर निगम की ओर से साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिया गया। सभी छठ पूजा स्थलों पर पेयजल की व्यवस्था भी की गई।

पूर्वांचल जन कल्याण समिति के सचिव अशोक चतुर्वेदी ने बताया कि 20 वर्ष से उनकी संस्था रामगंगा किनारे छठ पूजा का आयोजन करा रही है। इसमें छठ व्रती महिला-पुरुष और नवदंपति भाग लेते हैं। पूर्वांचल के अधिकांश अधिकारी भी इसी घाट पर पूजा करते हैं। छठ पूजा में सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा का प्रचलन और उन्हें
अर्घ्य देने का विधान है। 28 अक्टूबर से नहाय खाय से इस पर्व की शुरुआत हो गई। शनिवार को खरना मनाया गया।

छठ पूजा में सामग्री का होता है विशेष महत्व
पूर्वांचल जन कल्याण समिति के अध्यक्ष पंकज शर्मा ने बताया कि छठ पूजा में एक-एक विधि-विधान को महत्व दिया गया है। इन विधि-विधानों में पूजन सामग्री का विशेष महत्व है। इसके बिना छठ पूजा अधूरी मानी जाती है। छठ पूजा के लिए बांस या पीतल का सूप, बांस के फट्टे से बने दौरा, डलिया, डगरा, पानी वाला नारियल, पत्ता लगा गन्ना, सुथनी, शकरकंदी, हल्दी, अदरक का पौधा (हरा हो तो अच्छा), नाशपाती, नींबू बड़ा, शहद की डिब्बी, पान, साबुत सुपारी, कैराव, सिंदूर, कपूर, कुमकुम, चावल (अक्षत), चन्दन, मिठाई की आवश्यकता होती है। इसके अलावा घर में बने हुए पकवान जैसे ठेकुवा, खस्ता, पुवा, चावल के लड्डू भी पूजन सामग्री में शामिल किए जाते हैं।

मानसिक शांति प्रदान करता है छठ पूजा का अनुष्ठान
बुद्धि विहार निवासी सुधा चौरसिया ने बताया कि वह 17 साल से छठ मैया का व्रत करती हैं। उनका कहना है कि छठ पूजा का अनुष्ठान मानसिक शांति प्रदान करता है। ऊर्जा का स्तर और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। जलन-क्रोध की आवृत्ति और नकारात्मक भावनाओं को काफी कम कर देता है। खरना वाले दिन को छोटी छठ भी कहते हैं। इसका मुख्य प्रसाद ठेकुआ होता है। इसमें सभी प्रकार के फल, गन्ना व सब्जियां चढ़ाई जाती हैं।

मानसिक शांति प्रदान करता है छठ पूजा का अनुष्ठान
बुद्धि विहार निवासी सुधा चौरसिया ने बताया कि वह 17 साल से छठ मैया का व्रत करती हैं। उनका कहना है कि छठ पूजा का अनुष्ठान मानसिक शांति प्रदान करता है। ऊर्जा का स्तर और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। जलन-क्रोध की आवृत्ति और नकारात्मक भावनाओं को काफी कम कर देता है। खरना वाले दिन को छोटी छठ भी कहते हैं। इसका मुख्य प्रसाद ठेकुआ होता है। इसमें सभी प्रकार के फल, गन्ना व सब्जियां चढ़ाई जाती हैं।

कठिन होता है छठ का व्रत
छठ पूजा सेवा समिति के अध्यक्ष अंकित सिंह ने बताया कि छठ पूजा करने वाला व्यक्ति संयम की अवधि के चार दिनों तक अपने मुख्य परिवार से अलग हो जाता है। पूरी अवधि में वह शुद्ध भावना के साथ एक कंबल के साथ फर्श पर सोता है। माना जाता है कि यदि एक बार छठ पूजा शुरू करने पर इसे परिवार में किसी की मृत्यु पर ही छोड़ा जा सकता है। भक्त छठ पर मिठाई, खीर, ठेकुआ और फल सहित बांस की टोकरी में सूर्य को प्रसाद अर्पण करते है।

पूर्वांचल वासियों ने छठ पूजा के लिए की डाला की खरीदारी
मुरादाबाद। छठ पूजा के लिए पूर्वांचल वासियों ने शनिवार को डाला की खरीदारी की। उन्होंने नारयिल, हल्दी, गन्ना, अदरक और अन्य पूजा सामग्री खरीदी। कुछ लोगों ने कोसी का सामान भी खरीदा। डाला भरने के लिए लाइनपार सब्जी मंडी में एक ही दुकान थी। इसलिए दुकान पर काफी भीड़ रही। यहां सूप, टोकरी, हरी हल्दी समेत पूजा की सामग्री, फल आदि उपलब्ध थे। लाइनपार निवासी मिनी मिश्रा ने बताया कि इस बार महंगाई ज्यादा है। इसलिए थोड़ा ही सामान खरीदा है। दुकानदार का कहना था कि जो गन्ना पहले पांच-10 रुपये का मिलता था वह अब 30 रुपये का मिल रहा है। छठ पर्व पर डाला बनाने वाले जौहरी गुप्ता ने बताया कि वह पिछले 30 साल से डाला बनाने का काम कर रहे हैं। बाजार में बांस की टोकरी 125 से 200 रुपये तक बिक रही है। सूप भी 75 रुपये का है। पूजा का सामान भी कम से कम 200 रुपये का है। एक गन्ना 20 से 30 रुपये, पानी वाला नारियल 20 और सूख नारियल 25 रुपये का बिक रहा है। जौहरी गुप्ता के अनुसार सब्जी मंडी में केवल वही डाला भरते हैं, इसके बाद भी ग्राहक काफी कम आए हैं।

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