विकास दुबे मुठभेड़: जस्टिस चौहान को जांच आयोग की कमान

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की मुठभेड़ की जांच के लिए अपने पूर्व न्यायाधीश बी एस चौहान की अध्यक्षता में एक जांच आयोग के गठन को बुधवार को मंज़ूरी दे दी। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति चौहान का …

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की मुठभेड़ की जांच के लिए अपने पूर्व न्यायाधीश बी एस चौहान की अध्यक्षता में एक जांच आयोग के गठन को बुधवार को मंज़ूरी दे दी। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति चौहान का नाम न्यायालय को सुझाया।

सॉलिसिटर जनरल ने मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि न्यायमूर्ति चौहान आयोग का हिस्सा बनने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने जांच टीम का हिस्सा बनने के लिए राज्य सरकार के पूर्व पुलिस महानिदेशक के.एल. गुप्ता का नाम भी सुझाया। न्यायालय ने कहा कि आयोग एक सप्ताह में अपना काम शुरू कर देगा तथा दो महीने में उसे अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा कि उन्होंने भी न्यायमूर्ति चौहान के साथ कई मामलों की सुनवाई की है, उन्होंने भी उनके नाम का सुझाव दिया होता। याचिकाकर्ता अनूप प्रकाश अवस्थी और घनश्याम उपाध्याय ने कहा कि उन्हें न्यायमूर्ति चौहान पर पूरा भरोसा है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि राज्य द्वारा बनाई गई कमेटी को किसी भी कीमत पर मामले की जांच में शामिल नहीं होने देना चहिए। पुलिस ने अब तक मामले में छह मुठभेड़ किये, और अब मामले में पुलिस के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जानी चहिए। याचिकाकर्ता अनूप अवस्थी ने कहा कि विकास दुबे के एनकाउंटर का आदेश सीधे मुख्यमंत्री ने दिया था, इसकी भी जांच की जानी चाहिए।

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