आगरा के बाद एकेटीयू का रूख करेगी एसटीएफ, विनय पाठक यहां भी रहें हैं तैनात
अमृत विचार लखनऊ ( एक्सक्लूसिव) । कानपुर छत्रपित शाहूजी महाराज कुलपति प्रो. विनय पाठक पर कमीशन के आरोपों की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। यूपी एसटीएफ आगरा विश्वविद्यालय से सभी साक्ष्य जुटा रही है। वहीं दूसरी प्रोफेसर विनय पाठक की कुंडली एकेटीयू से भी एसटीएफ खंगालेगी। दरअसल प्रोफेसर पाठक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम …
अमृत विचार लखनऊ ( एक्सक्लूसिव) । कानपुर छत्रपित शाहूजी महाराज कुलपति प्रो. विनय पाठक पर कमीशन के आरोपों की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। यूपी एसटीएफ आगरा विश्वविद्यालय से सभी साक्ष्य जुटा रही है। वहीं दूसरी प्रोफेसर विनय पाठक की कुंडली एकेटीयू से भी एसटीएफ खंगालेगी। दरअसल प्रोफेसर पाठक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के दो बार कुलपति रहें हैं। एसटीएफ को एक 80 पेजों की जो शिकायत मिली हैं उसमें एकेटीयू कुलपति रहते प्रोफेसर पाठक ने जो कारनामें किए हैं उसके सभी राज छिपे हैं। इस संबंध में सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि अगर एकेटीयू की परतें खुलीं तो प्रोफेसर पाठक का सालों जेल से बाहर आना मुश्किल होगा। फिलहाल प्रोफेसर पाठक कहां इसकी जानकारी अभी किसी को नहीं है। वहीं दूसरी ओर एसटीएफ को कोर्ट की ओर से गिरफ्तारी के फैसले का इंतजार है।
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वहीं दूसरी ओर अजय जैन ने कई राज कबूले। एसटीएफ दावा है कि अजय मिश्रा के जरिए अजय जैन ही कमीशन का पैसा मैनेज करता था। अजय जैन ने अपनी कम्पनी के जरिये 40 से अधिक ई-वे बिल अकेले इस विश्वविद्यालय में लगाये। यह सब कुछ अजय जैन से गिरफ्तारी के बाद रविवार रात पूछताछ में सामने आया। अजय जैन ने विनय पाठक के करीबी अजय मिश्र के बारे में भी कई जानकारियां दी।
एसटीएफ के अधिकारी ने बताया कि अजय जैन ने कई सवालों पर चुप्पी साधे रखी। लेकिन कुछ दस्तावेज दिखाने पर उसने कई राज उगले। उसने कुबूला कि खुर्रमनगर निवासी अजय मिश्र के कहने पर उसने भ्रष्टाचार के रुपयों को मैनेज किया था। यह सब विनय पाठक के कमीशन के लिये किया गया था। अजय मिश्र को एसटीएफ ने सबसे पहले इस मामले में गिरफ्तार किया था।
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