शक्तिफार्म: सिडकुल ने अपनी तीन एकड़ जमीन को कराया अतिक्रमण मुक्त 

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Edited By Amrit Vichar
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शक्तिफार्म, अमृत विचार। सिडकुल की जमीन पर अतिक्रमण कर की जा रही कृषि एवं बनाई गई झोपड़ी को प्रशासन की संयुक्त टीम ने ध्वस्त कर दिया। सिडकुल के क्षेत्रीय प्रबंधक रविंद्र सिंह ने बताया कि आधा अतिक्रमण ध्वस्त किया गया है शेष अतिक्रमण हटाने के लिए अतिक्रमणकारियों को एक हफ्ते का समय दिया गया है। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाने पर तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सिडकुल की जमीन पर एक गुर्जर परिवार द्वारा वर्षों से अतिक्रमण कर झोपड़ी बना ली गई थी जहां पर अतिक्रमणकारी द्वारा लगभग 3 एकड़ भूमि पर खेती करने के साथ ही जानवर भी पाले जा रहे थे। गुरुवार को उप जिलाधिकारी द्वारा गठित सिडकुल, राजस्व, पुलिस, एवं वन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्यवाही करते हुए सिडकुल की भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए चार झोपड़ियों में से दो को ध्वस्त कर दिया जबकि बाकी दो झोपड़ियों को हटाने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है। 

अतिक्रमणकारी का कहना था कि वह लोग करीब चार दशक से यहां रह रहे हैं। आए दिन उन्हें परेशान किया जा रहा था। बिना नोटिस दिए टीम द्वारा उनकी झोपड़ी को ध्वस्त कर आग लगा दी गई। जबकि इस आरोप को सिडकुल के क्षेत्रीय प्रबंधक रविंद्र सिंह ने निराधार करार देते हुए कहा कि वहां पर जानवरों के लिए पहले से अंगीठी जली हुई थी उसी से आग लग गई थी।

अलीशेर अवैध रूप से रह रहा है। अलीशेर को जानवर चराई एवं हक हकूक के लिए रनसाली वन क्षेत्र में जगह आवंटित हुई है। परंतु वह आवंटित स्थान पर न रहकर, किशनपुर वन क्षेत्र के निकट बेशकीमती सिडकुल के भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर रह रहा था। किशनपुर वन विभाग के पास अलीशेर के नाम कोई रिकॉर्ड नहीं है। यहां भूमि वन विभाग की नहीं है सिडकुल को आवंटित भूमि है। - घनश्याम चिनियाल, वन क्षेत्राधिकारी, किशनपुर

राजस्व विभाग के अभिलेखों की जांच की गई थी जिसमें अलीशेर का कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया। और न ही वन विभाग के पास कोई रिकॉर्ड है। अलीशेर को वर्ष 2021 से अतिक्रमण हटाने के लिए निर्देशित किया जा रहा था। सितंबर 2022 को भी पुनः बोला गया था परंतु उनके द्वारा स्वयं अतिक्रमण न हटाने पर कार्यवाही करते हुए अवैध रूप से बनी चार में से दो झोपड़ियों को ध्वस्त कर शेष अतिक्रमण को एक हफ्ते के भीतर हटा लेने का लिखित निर्देश दिया गया। लगभग 3 एकड़ सिडकुल की भूमि पर कब्जा किया गया था। अतिक्रमणकारी द्वारा झोपड़ी के साथ-साथ खेती भी की जा रही थी जिसे भी मुक्त करा लिया गया। - रविंद्र सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, सिडकुल-सितारगंज

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