बहराइच : चुप रहकर बन जाओगे विलुप्त प्राय पक्षी : जितेंद्र
अमृत विचार, बहराइच। शहर के केडी पैलेस में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारिका विमोचन समारोह में अखिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन बहराइच/श्रावस्ती द्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। जिसमें विभिन्न प्रांतों से स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में पहुंचकर बात रखी।
आयोजन की शुरुआत 113 वर्षीय वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी लेखराज एवं गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा गठित एमिनेंट कमेटी के सदस्य पाण्डुरंग गणपति शिंदे द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर की गई। आयोजकों के द्वारा देश के विभिन्न भागों से आए हुए पदाधिकारियों का स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र तथा प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया।
आयोजन के मूलाधार 113 वर्षीय वरिष्ठतम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी लेखराज, पाण्डुरंग गणपति शिंदे, राम विचार पाण्डेय, अवतार सिंह एवं वीरांगना प्रेम देवी ने स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान दी गई यातनाओं का उल्लेख करते हुए उपस्थित पदाधिकारियों को भीतर तक झंकृत किया। अमर शहीद मंगल पाण्डेय के प्रपौत्र रघुनाथ पाण्डेय, शहीदे आजम नवाब मज्जू खान के प्रपौत्र सलीमुद्दीन फारूकी तथा अमर शहीद राजा देवी बक्श सिंह के वंशज श्री माधवराज सिंह ने भी आजादी के अनछुए तथ्यों से सेनानी परिवारों को झकझोरा।
स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय महासचिव तथा आयोजन के मुख्य प्रवक्ता जितेन्द्र रघुवंशी ने सेनानी परिवारों को अपनी गरिमा पहचानने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों के त्याग और बलिदान से मिली आजादी का सुख भोग रही सरकारों ने सेनानी परिवारों को भिखारी की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ही सेनानी परिवारों को राष्ट्रीय परिवार घोषित करके इन परिवारों का सम्पूर्ण दायित्व सरकार को उठाना चाहिए था, किन्तु दुर्भाग्य है कि इन परिवारों का करुण क्रन्दन भी सरकारों को नींद से नहीं जगा पा रहा है। हरदोई से आए स्वतंत्रता सेनानी परिवार प्रतिनिधि आचार्य राम महेश मिश्र के मंचीय समन्वयन व संचालन में सम्पन्न सम्मेलन में बोलते हुए रघुवंशी ने सेनानी परिवारों को अपना पुरुषार्थ तराशने और अपने पूर्वजों के सम्मान तथा अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संकल्पित करते हुए कहा कि अब पुनः इतिहास दुहराने के लिए तैयार हो जाएं, अन्यथा गौरैया पक्षी की भांति सेनानी परिवार भी लुप्त प्रजाति की श्रेणी में आ जाएंगे।
सेनानी परिवारों को कपूर सिंह दलाल, रमेश कुमार मिश्र, इशरत उल्ला खान, सुरेश चंद्र बबेले, सूर्य कुमार पांडेय, महन्थ प्रजापति, राजेश सिंह, अरुण सिंह तथा प्रेम देवी, रमेश उपाध्याय, अरुण प्रताप सिंह, मधुसूदन झा, अवधेश पन्त, रामचन्द्र पिल्दे ने भी संबोधित किया।
