संतों और कारसेवकों को ट्रस्ट में स्थान क्यों नहीं: बृजमोहन दास

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अयोध्या। जन्मस्थान पर मन्दिर निर्माण के लिए भूमिपूजन तय होने और प्रधानमंत्री का कार्यक्रम फाइनल होने से अयोध्या के साधु सन्त तथा लोग मुदित हैं। मंदिर आंदोलन से जुड़े साधु सन्तों तथा बलिदानी कारसेवकों को लेकर संतो के सवाल भी हैं। जो मौका मिलने पर बरबस सामने आ जा रहे हैं। प्रस्तावित राम मंदिर को …

अयोध्या। जन्मस्थान पर मन्दिर निर्माण के लिए भूमिपूजन तय होने और प्रधानमंत्री का कार्यक्रम फाइनल होने से अयोध्या के साधु सन्त तथा लोग मुदित हैं। मंदिर आंदोलन से जुड़े साधु सन्तों तथा बलिदानी कारसेवकों को लेकर संतो के सवाल भी हैं। जो मौका मिलने पर बरबस सामने आ जा रहे हैं। प्रस्तावित राम मंदिर को गगनचुंबी और विश्व का इकलौता मंदिर बनाए जाने की मांग को लेकर समर्थन जुटाने के लिए हस्ताक्षर अभियान में जुटे संगठनों के लोग मांग पत्र पर हस्ताक्षर कराने चौबुर्जी मंदिर पहुंचे। मंदिर के महंत बृजमोहन दास के सीने में दफन पीड़ा बाहर आ गई।

चौबुर्जी मंदिर के महंत बृजमोहन दास ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में लाखों लोगों ने बलिदान दिया है लाखों लोगों ने संघर्ष किया है किंतु मंदिर की कम ऊंचाई उनके संघर्षों, तप, और तपस्या, को कम करने का कार्य कर रही है अगर मंदिर की ऊंचाई 251 मीटर की होती है तो उसकी धर्म ध्वजा पूरे विश्व में हिंदू और हिंदुत्व का गौरव आमंत्रित करने का कार्य करती। विक्रमादित्य काल के राम मंदिर की ध्वजा 42 किलोमीटर दूर से ही दिखाई देती थी। उन्होंने कहा कि साधु संतों को स्टाम्प समझ लिया गया है। मंदिर निर्माण के लिए बने ट्रस्ट में ना तो अयोध्या के संत धर्म आचार्यों को जगह दी गई और न ही बलिदानी कारसेवकों को। जबकि उनको स्थान मिलना चाहिए।

समर्थन हासिल करने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाने वालों में बाबरी विध्वंस के आरोपी व धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे, हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व कारसेवक अधिवक्ता मनीष पांडेय,धर्म सेना के प्रदेश अध्यक्ष रवि शंकर पांडेय, अजय द्विवेदी शामिल रहे।

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