डोभाल-वांग यी के बीच सहमति का सम्मान करे चीन: भारत
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कुछ स्थानों से पीछे नहीं हटने की रिपोर्टों के बीच भारत ने चीन को आज पुन: चेताया कि उसे विशेष प्रतिनिधियों की सहमति के अनुरूप पूरी तरह से पीछे हटने और शांति एवं स्थिरता बहाल करने के लिए गंभीरता से काम करना चाहिए। …
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कुछ स्थानों से पीछे नहीं हटने की रिपोर्टों के बीच भारत ने चीन को आज पुन: चेताया कि उसे विशेष प्रतिनिधियों की सहमति के अनुरूप पूरी तरह से पीछे हटने और शांति एवं स्थिरता बहाल करने के लिए गंभीरता से काम करना चाहिए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने यहां नियमित ब्रीफिंग में कहा,“ हमारी अपेक्षा है कि चीनी पक्ष हमारे साथ सेनाओं को पूरी तरह से हटाने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण रूप से शांति एवं स्थिरता बहाल करने के लिए गंभीरता से काम करेगा जैसा कि दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सहमति कायम हुई है।”
पेंगांग झील, हाॅट स्प्रिंग इलाकों में चीनी सेना के पीछे हटने में विलंब से उपजी आशंकाओं के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता ने कहा कि भारत सरकार वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर पिछले कुछ हफ्तों में अनेक बयानों में अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान एवं सख्ती से अनुपालन, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता का आधार है। भारत एवं चीन के बीच 1993 के बाद हुए कई समझौतों में इसे दृढ़ता से रेखांकित किया गया है।
अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि 26 जून को उन्होंने कहा था कि चीनी सेना का इस वर्ष का आचरण, बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती एवं व्यवहार में बदलाव के साथ साथ गैरवाजिब एवं बेतुकेे दावे सभी समझौतों के पूरी तरह से विपरीत हैं। हमने यह भी कहा है कि भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा के अनुपालन एवं सम्माने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है और हम एकतरफा ढंग से यथास्थिति में किसी भी बदलाव को कतई स्वीकार नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत में दोनों पक्ष सेनाओं को वास्तविक नियंत्रण रेखा से पूरी तरह से हटाने और भारत चीन सीमा पर पूर्णत: शांति एवं स्थिरता कायम करने पर सहमत हुए थे। दोनों पक्ष इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कूटनीतिक एवं सैन्य चैनलों के माध्यम से गहन बातचीत में लगे हैं। चौदह जुलाई को वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की चौथी बैठक में इस दिशा में और कदम उठाने के बारे में विचार विमर्श हुआ है।
उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय की कार्यप्रणाली की अगली बैठक जल्द होने की संभावना है। सीमा पर शांति एवं स्थिरता हमारे द्विपक्षीय संबंधों का आधार है। इसलिए हमारी अपेक्षा है कि चीनी पक्ष विशेष प्रतिनिधि स्तर की बैठक में बनी सहमति के अनुरूप हमारे साथ सेनाओं को पूरी तरह से हटाने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण रूप से शांति एवं स्थिरता बहाल करने के लिए गंभीरता से काम करेगा।
जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत की अवमानना कर रहा है पाकिस्तान
प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कुलभूषण जाधव को राजनयिक संपर्क एवं न्यायिक अधिकार दिये जाने को लेकर पाकिस्तान की आनाकानी पर नाराजगी जाहिर की है और कहा है कि यह ना केवल अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है और भारत इसके विरुद्ध अपील के अधिकार का प्रयोग करेगा।
प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने एक साल में कुलभूषण जाधव से राजनयिक संपर्क के लिए 12 बार अनुरोध किया और पाकिस्तान अब तक उनसे निर्बाध राजनयिक संपर्क नहीं सुलभ करा पाया है। 16 जुलाई को भारतीय राजनयिकों से जाधव की बैठक को पाकिस्तान सरकार ने बाधित किया और उन्हें जाधव को कोई भी दस्तावेज नहीं सौंपने का निर्देश दिया। इस कारण भारतीय राजनयिक जाधव से मुख्तारनामा (पावर ऑफ अटार्नी) हासिल नहीं कर पाये।
उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान से श्री जाधव के मुकदमे के बारे में प्रासंगिक दस्तावेज मुहैया कराने का बार-बार अनुरोध किया। पाकिस्तान ने भारत से कहा कि दस्तावेज किसी अधिकृत पाकिस्तानी वकील को मुहैया कराये जा सकते हैं। इसलिए भारत ने दस्तावेज हासिल करने के लिए एक पाकिस्तानी वकील को अनुबंधित किया लेकिन हैरानी की बात रही कि पाकिस्तान सरकार ने उस पाकिस्तानी वकील को भी दस्तावेज देने से इन्कार कर दिया। इस सबके बावजूद भारत ने 18 जुलाई को अदालत में याचिका दायर करने की कोशिश की। पर पाकिस्तानी वकील से सूचित किया कि मुख्तारनामे एवं अन्य जरूरी दस्तावेजों के अभाव में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की जा सकी।
