चुनौतियों के बीच
वैश्विक संस्थाएं अपनी भूमिका का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं कर पा रही हैं।
कोरोना महामारी के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन विवाद और बहुपक्षीय व्यवस्था का कमजोर पड़ना, ये ऐसी चुनौतियां हैं, जो दुनिया को नुकसान
कोरोना महामारी के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन विवाद और बहुपक्षीय व्यवस्था का कमजोर पड़ना, ये ऐसी चुनौतियां हैं, जो दुनिया को नुकसान पहुंचा रही हैं। यानि दुनिया के सामने चुनौतियों का अंबार लगा हुआ है। वैश्विक संस्थाएं अपनी भूमिका का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं कर पा रही हैं।
बहुपक्षीय संस्थाओं के कमजोर पड़ने से दुनिया बदल रही है। ऐसे में दुनिया की बीस बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्षों का शिखर सम्मेलन इंडोनेशिया के बाली में मंगलवार से हो रहा है। जी20 शिखर सम्मेलन 2008 की आर्थिक मंदी के बाद शुरू हुआ था। उस समय विकसित देशों ने दुनिया को मंदी से उबारने की कोशिश में विकासशील देशों को भी साथ लेने का फैसला किया था। तब से इस समूह की नियमित शिखर बैठक होती रही हैं।
ये सम्मेलन आर्थिक मामलों में सहयोग का प्रमुख वैश्विक फोरम भी है। जी 20 ऐसा मंच है जिसकी कुछ विश्वसनीयता बची हुई है। इसके सदस्य राष्ट्रों में दुनिया की 67 फीसदी आबादी रहती है। ये देश ग्लोबल जीडीपी में कम से कम 85 फीसदी और ग्लोबल ट्रेड में 75 फीसदी योगदान देते हैं।
सम्मेलन में शामिल होने के लिए बाली रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शिखर सम्मेलन के दौरान वे वैश्विक विकास को फिर से पटरी पर लाने, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य और डिजिटल परिवर्तन जैसे वैश्विक चिंता के प्रमुख मुद्दों पर जी20 के अन्य नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। भारत ने हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद, विश्व व्यापार संगठन और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे तमाम अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इन देशों की आवाज मजबूती से उठाई है।
समापन समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो भारत को जी20 की अध्यक्षता सौंपेंगे। भारत ऐसे समय में जी20 की अध्यक्षता संभाल रहा है, जब दुनिया में संकट और अव्यवस्था के हालात हैं। भारत इसके जरिये विश्व की ‘अग्रणी शक्ति’ की भूमिका निभाने को तैयार है। क्षमताओं के लिहाज से देखा जाए तो भारत के अध्यक्षता संभालने का इससे बेहतर समय कोई और नहीं हो सकता था।
जी20 का ही एक छोटा समूह है जिसे जी 7 कहते हैं। इसमें दुनिया के सबसे विकसित राष्ट्र सदस्य के तौर पर शामिल हैं। बहरहाल, जी-20 का यह शिखर सम्मेलन जिन हालात में हो रहा है, वे भी किसी मायने में सामान्य नहीं कहे जा सकतीं। देखना होगा कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने का क्या हल इस दो दिवसीय सम्मेलन से निकलता है।
