संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा प्रस्ताव- रूस नुकसान का यूक्रेन को दे मुआवजा, भारत वोटिंग से रहा दूर
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा काम्बोज ने कहा कि हमें निष्पक्ष रूप से विचार करना चाहिए कि क्या UNGA में वोट के माध्यम से एक पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया संघर्ष के समाधान के प्रयासों में योगदान देगी।
वॉशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सोमवार को यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से हुए नुकसान के लिए प्रत्यावर्तन और उपचार तंत्र के निर्माण के लिए बुलाए गए एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। 94 देशों ने इसके पक्ष में और 14 देशों ने इसके विरोध में मतदान किया। भारत सहित 73 देशों ने भाग नहीं लिया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा काम्बोज ने कहा कि हमें निष्पक्ष रूप से विचार करना चाहिए कि क्या UNGA में वोट के माध्यम से एक पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया संघर्ष के समाधान के प्रयासों में योगदान देगी। इसके अलावा, UNGA के इस प्रस्ताव पर कानूनी वैधता अस्पष्ट बनी हुई है।
रुचिरा काम्बोज ने कहा कि हमें पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय कानूनी जांच के बिना तंत्र नहीं बनाना चाहिए। हमें ऐसे कदमों से बचने की जरूरत है जो बातचीत और वार्ता और इस संघर्ष को समाप्त करने की संभावना को रोकते या खतरे में डालते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में यूरोपीय संघ के मिशन ने एक ट्वीट कर कहा कि आज यूएन महासभा ने मान्यता दी है कि रूस को यूक्रेन के खिलाफ अपनी आक्रामकता के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। 94 से 14 वोटों से इसे अपनाया गया। यूएनजीए का यह संकल्प नुकसान का दस्तावेजीकरण करने तंत्र स्थापित करनेऔर नुकसान के लिए उचित मुआवजे की सिफारिश करता है।
पश्चिमी देशों की ओर से प्रस्तुत किए गए मसौदे में यूक्रेन में किए गए कार्यों के लिए रूस की निंदा करने का आह्वान किया गया था। प्रस्ताव लाने में सहभागी रहे चेक गणराज्य ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के कारण हुए उल्लंघनों और क्षति के लिए रूस को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में चेक गणराज्य के मिशन ने ट्वीट कर कहा कि आज यूएन के सदस्य देशों ने मतदान किया कि रूस को यूक्रेन में युद्ध के दौरान हुए उल्लंघनों और क्षति के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। चेक गणराज्य महासभा में के इस प्रस्ताव को लाने में सहभागी रहा, जिसमें क्षति और उसकी पूर्ति के लिए तंत्र की स्थापना की सिफारिश की गई थी।
बता दें कि इस साल फरवरी के अंत में यूक्रेन में शुरू हुए रूसी अभियान में अब तक हजारों सैन्य कर्मी मारे जा चुके हैं। यूक्रेन में जारी युद्ध ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को भी प्रभावित किया है और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि हुई है।
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