साइबर सुरक्षा
भारत इंटरनेट का दूसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है।
डिजिटल शक्ति अभियान के तीन चरण पूरे हो चुके हैं। अभियान का मकसद अखिल भारतीय स्तर पर साइबर जगत में महिलाओं को सशक्त
डिजिटल शक्ति अभियान के तीन चरण पूरे हो चुके हैं। अभियान का मकसद अखिल भारतीय स्तर पर साइबर जगत में महिलाओं को सशक्त और कुशल बनाना है। अभियान के चौथे चरण की शुरुआत बुधवार को हुई। आशा है चौथा चरण महिलाओं के लिए सुरक्षित साइबर स्पेस सुनिश्चित करेगा। भारत इंटरनेट का दूसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है।
डिजिटल शक्ति अभियान साइबर क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों को डिजिटल रूप से सशक्त और कुशल बनाने की अखिल भारतीय परियोजना है।
अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, डिजिटल शक्ति 4 महिलाओं को डिजिटल रूप से कुशल बनाने और ऑनलाइन माध्यम से किसी भी अवैध/अनुचित गतिविधि के खिलाफ खड़े होने के लिए जागरूक करने पर केंद्रित है। अभियान का तीसरा चरण मार्च 2021 में शुरू किया गया था।
इस चरण में साइबर अपराध का सामना करने की स्थिति में रिपोर्टिंग के सभी तरीकों की जानकारी प्रदान करने के लिए परियोजना के अंतर्गत संसाधन केंद्र भी विकसित किए गए थे।
डिजिटल शक्ति की शुरुआत जून 2018 में देश भर की महिलाओं को डिजिटल क्षेत्र में जागरूकता के स्तर को बढ़ाने, लचीलापन अपनाने और साइबर अपराध से प्रभावी तरीकों से लड़ने में मदद करने के लिए की गई थी। पूरे भारत में इस परियोजना के माध्यम से तीन लाख से अधिक महिलाओं को साइबर सुरक्षा परामर्शों और सूझ-बूझ, रिपोर्टिंग और निवारण व्यवस्था, डेटा गोपनीयता और उनके लाभ के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग से अवगत कराया गया है।
पहले और आज के समय में काफी अंतर आ गया है। अब हर क्षेत्र में बदलाव और नए प्रयोग हो रहे हैं। हालांकि महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज़ से डिजिटल क्रांति मददगार साबित हुई है। महिलाओं से संबंधित अधिकार और जरूरी जानकारियां उन तक पहुंच रही हैं, जिसने उन्हें जागरूक बनाने के साथ-साथ जानकार भी बनाया है। परंतु महिलाएं सबसे ज्यादा साइबर हमले का शिकार होती हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि क्या महिलाएं डिजिटल सिक्योरिटी के बारे में कुछ जानती हैं?
पर्याप्त ई-कौशल की कमी, सुरक्षा उपायों और उनके डिजिटल अधिकारों के बारे में जानकारी की कमी, महिलाओं को खतरे में डालती है और अपराधियों के लिए एक आसान शिकार बनती हैं। इसलिए महिलाएं अपनी सुरक्षा के लिए जागरूक बने व घर में अन्य महिलाओं व बालिकाओं को भी इसकी जानकारी दें। डिजिटल युग में सांस्कृतिक रूप से अलाभकर स्थिति को कम करने के लिए, डिजिटल साक्षरता हमारे पास एकमात्र उपाय है।
