हरियाणा: सोहना में अरावली पहाड़ियों में सुरंग निर्माण का कार्य पूरा

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संजय सिंह, सोहना। पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के रेवाड़ी-दादरी खंड पर गुरुग्राम और मेवात जिलों के बीच अरावली पहाड़ियों में सोहना के निकट बनी सुरंग निर्माण का काम शुक्रवार को पूरा हो गया। एक किलोमीटर लंबी सुरंग के पश्चिमी छोर को डीएफसीसी के उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में खोला गया। इसी के साथ पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर …

संजय सिंह, सोहना। पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के रेवाड़ी-दादरी खंड पर गुरुग्राम और मेवात जिलों के बीच अरावली पहाड़ियों में सोहना के निकट बनी सुरंग निर्माण का काम शुक्रवार को पूरा हो गया। एक किलोमीटर लंबी सुरंग के पश्चिमी छोर को डीएफसीसी के उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में खोला गया। इसी के साथ पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर से जुड़े एक अहम प्रोजेक्ट का कार्य एक वर्ष से भी कम के रिकार्ड समय में सफल समापन हुआ।

ये सुरंग 100 किलोमीटर की रफ्तार और 25 टन एक्सल लोड वाली डबल स्टेकर या दुमंजिला कंटेनर ट्रेनों के हिसाब से बनाई गई है। इसका एक सिरा जिसे पोर्टल-1 नाम दिया गया है, रेवाड़ी की ओर खुलता है। जबकि दूसरा सिरा यानी पोर्टल-2 का मुख दादरी की तरफ है।

इस सुरंग को बनाना इसलिए चुनौतीपूर्ण था क्योंकि यहां पड़ने वाली चट्टानें अलवर अजबगढ़ समूह वाली 25 से 50 करोड़ वर्ष पुरानी क्वार्टजाइट, शिष्ट और स्लेट श्रेणी की होने के कारण अत्यंत सख्त हैं जिन्हें काटना काफी कठिन कार्य था। इसके अलावा इसका कुछ हिस्सा सीधा और कुछ घुमावदार है। सीधे हिस्से की चौड़ाई 14.5 मीटर और ऊंचाई 10.5 मीटर है, जबकि घुमावदार हिस्से की चौड़ाई 15 मीटर और ऊंचाई 12.5 मीटर रखी गई है ताकि ट्रेनों के साइड या छत से टकराने की कोई गुंजाइश न रहे।

इस टनल को बनाने में हाई-टेक बूमर डबल आर्म टाइप की दो टनल बोरिंग मशीनों, 12 मीटर पहुंच वाली दो शॉटक्रीट रोबोटिक आर्म टाइप 6 सीयूएएम क्षमता वाले 5 ट्रांजिट मिक्स्चर 20 टन भार क्षमता वाले 10 हाइवा, एक सीजर लिफ्ट, 500 केवीए क्षमता वाले 3 जनरेटर सेट, दो कंक्रीट पंप, ग्राउट पंप तथा आरओसी का इस्तेमाल किया गया।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन (डीएफसीसी) के प्रबंध निदेशक अनुराग सचान ने बताया कि ये डबल स्टैक कंटेनरों के मूवमेंट के लिए बनाई गई विश्व की पहली विद्युगीकृत टनल होगी। इसका सफल निर्माण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी सतह तो समतल है, किंतु इसके आगे-पीछे दोनों ओर का ट्रैक काफी ढलावदार है। इसे अर्द्ध चन्द्राकार या हॉर्स शू के शेप में बनाया गया है। टनल की छत से ओएचई यानी ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर से अटैच करने के अलावा एस एन्ड टी यानी सिग्नल व टेलीकॉम वायर को केबल ट्रे के माध्यम से लटकाया गया है। जबकि पानी के प्रवाह के लिए दोनों ओर नालियां बनाई गई हैं।

डीएफसीसी के महाप्रबंधक वेदप्रकाश के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी कारीडोर्स में कुल मिलाकर 6 टनल हैं। पश्चिमी कॉरिडोर में इस सोहना टनल के अलावा 320 मीटर लंबी बसई नार्थ डिटूर टनल, 430 किलोमीटर लंबी बसई साउथ डिटूर टनल हैं। जबकि पूर्वी कॉरिडोर में सोननगर-गोमोह सेक्शन में 150, 475 और 300 मीटर लंबी तीन टनल हैं।

उन्होंने बताया दोनों फ्रेट कॉरिडोर में से फ़िलहाल पूर्वी कॉरिडोर का खुर्जा-भादन सेक्शन और पश्चिमी कॉरिडोर का मदार- रिवाड़ी सेक्शन यातायात के लिए खुल चुके हैं और डीएफसीसी इन पर अब तक 1600 फ्रेट ट्रेनों का संचालन कर चुका है। कोरोना महामारी के बावजूद दोनों कॉरिडोर पर तेजी से काम चल रहा है और उम्मीद है कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) वाले सेक्शन को छोड़कर दोनों कॉरिडोर जून, 2022 तक पूरे हो जाएंगे।

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