अयोध्या : मेला-ठेला और आयोजनों से बेपटरी हुई अयोध्या में पढ़ाई-लिखाई
पाबंदियों में जकड़ जाती है नगरी, शिक्षा केंद्र बन जाते हैं सुरक्षा बलों के ठौर
25 से शुरू हो रही सेमेस्टर परीक्षा, फिर छात्र-छात्राओं को प्रस्तुति व भीड़ का जिम्मा
अमृत विचार, अयोध्या। धर्म और आस्था की नगरी अयोध्या में वर्ष भर मेला-ठेला के साथ विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है। मंदिर विवाद में फैसले व मंदिर निर्माण को लेकर वीआईपी मूवमेंट भी बढ़ा है। आए दिन सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर रामनगरी को पाबंदियों में जकड़ दिया जाता है। आवागमन को लेकर मार्ग परिवर्तित हो जाते हैं।
समय-समय पर आने वाले इस व्यवधान से रामनगरी के शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई-लिखाई बेपटरी हो जाती है। 25 नवंबर से अवध विश्वविद्यालय के संबद्ध महाविद्यालयों में सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। इसी बीच रामायण मेला भी होना है। संस्थानों को छात्र-छात्राओं को कार्यक्रमों में प्रतिभाग के साथ भीड़ बढ़ाने के लिए भेजने का जिम्मा सौंपा गया है। इससे प्रबंधन और विद्यार्थी ऊहापोह में हैं।
रामनगरी में तीन परंपरागत मेलों कार्तिक मेला, चैत्र रामनवमी मेला और सावन झूला मेला का आयोजन होता रहा है। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद इसी कड़ी में दीपोत्सव भी जुड़ गया है। इन मेलों में कई लाख की तादात में श्रद्धालु शिरकत करते हैं। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी फौज लगानी पड़ती है। जिनके ठौर के लिए शिक्षण संस्थानों को अधिग्रहित किया जाता है।
कई-कई दिन तक रूट डायवर्जन के साथ नगरी में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित होता है। सुप्रीम फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण के साथ वीआईपी मूवमेंट भी बढ़ा है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति से लेकर पीएम तक दौरा कर चुके हैं, सीएम का दौरा आम बात है। वीआईपी मूवमेंट को लेकर भी आवागमन प्रतिबंधित होता है। उसका खामियाजा विद्यार्थियों और अभिभावकों को उठाना पड़ता है।
लता चौक के उद्घाटन में तो भीड़ बढ़ाने के लिए छात्र-छात्राओं की ड्यूटी लगा दी गई। उच्च शिक्षा में 25 नवंबर से सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। वहीं विद्यार्थियों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति के साथ रामायण मेले को सफल बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।कई संस्थानों में रिहर्सल भी कराया जा रहा है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता गौरव तिवारी वीरू का कहना है कि भाजपा सरकार ने अयोध्या क्षेत्र में पठन-पाठन को अवरुद्ध कर दिया है। धर्म का एजेंडा चलाने वाली पार्टी को युवाओं के भविष्य से कोई मतलब नहीं है। उनका कहना है कि मेला और कार्यक्रम को लेकर एक सुव्यवस्थित योजना बननी चाहिए। विद्यार्थियों का हित संरक्षित किया जाना जरूरी है।
रामायण मेला समिति को मिले नए महामंत्री व कोषाध्यक्ष
आयोजन के नौ दिन पूर्व रामायण मेला समिति में दो नए पदाधिकारियों का चयन हुआ है। मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में कमलेश सिंह को कार्यकारी महामंत्री और प्रभात टंडन को कोषाध्यक्ष चुना गया है। 27 से 30 नवंबर के बीच आयोजित होने वाले 41वें रामायण मेले में पेंटिंग, रामाणयुगीन फैशन-शो, लोकनृत्य आदि प्रतियोगिता का आयोजन रामकथा पार्क में किया जाना है।
समस्त आयोजन छात्र-छात्राओं के जरिए ही होंगे। समिति के संयोजक आशीष कुमार मिश्रा ने बताया कि प्रतियोगिता में विजयी छात्र-छात्राओं को समापन के दिन पुरस्कृत किया जाएगा। बैठक में महंत सुरेश दास, महंत जन्मेजय शरण, डा. निर्मल खत्री, महामंत्री डॉ. वीएन अरोड़ा, नागा रामलखन दास, शैलेंद्र मिश्र छोटे, नंद कुमार मिश्र पेड़ा महाराज, डॉ. जनार्दन उपाध्याय, एसएन सिंह, कमलेश सिंह, शरद कपूर, आनंद शास्त्री आदि मौजूद रहे।
