आतंकवाद का वित्तपोषण

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

आतंकवाद पूरी मानवता को प्रभावित करता है और वैश्विक शांति व सुरक्षा के लिए खतरा है। आतंकी वित्त पोषण की समस्या ने इसे और अधिक गंभीर बना दिया है।

आतंकवाद पूरी मानवता को प्रभावित करता है और वैश्विक शांति व सुरक्षा के लिए खतरा है। आतंकी वित्त पोषण की समस्या ने इसे और अधिक गंभीर बना दिया है। तकनीकी क्रांति से आतंकवाद के रूप और प्रकार निरंतर बदल रहे हैं। आज आतंकी या आतंकी संगठन आधुनिक हथियार तथा इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, साइबर तथा फाइनेंसियल वर्ल्ड को अच्छी तरह से समझते हैं और उसका उपयोग भी करते हैं। आतंकवादी वित्तपोषण आतंकवादी गतिविधि के लिए धन प्रदान करता है।

आतंकवादी वित्त पोषण में वैध स्रोतों से प्राप्त धन जैसे कि व्यक्तिगत दान और व्यवसायों एवं धर्मार्थ संगठनों से लाभ आदि के साथ ही आपराधिक स्रोतों जैसे कि ड्रग व्यापार, हथियारों तथा अन्य सामानों की तस्करी, धोखाधड़ी, अपहरण और जबरन वसूली आदि शामिल हो सकते हैं। दक्षिण एशिया में अल-कायदा व आईएसआईएस का बढ़ता प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में उभर कर सामने आया है।

अल कायदा के साथ-साथ दक्षिण एशिया में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे गुट बेखौफ होकर आतंक फैलाने की फिराक में रहते हैं। आतंकवाद का वित्तपोषण, आतंकवाद से कहीं अधिक खतरनाक है, क्योंकि दुनिया के सभी देशों के अर्थतंत्र को कमजोर करने का भी काम आतंकवाद के वित्तपोषण से होता है। इसलिए जरूरी है कि आतंकवादी संगठनों को गैरकानूनी तरीके से हो रहा वित्त पोषण रोका जाए। हालांकि व्यापक रणनीति के बिना आतंकवाद के वित्त पोषण पर चोट करने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।

दिल्ली में चल रहे नो मनी फॉर टेरर मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब तक आतंकवाद जड़ से खत्म नहीं हो जाएगा, हम चैन से नहीं बैठेंगे। आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को इसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए।

आतंकवादियों के लिए सहानुभूति पैदा करने की कोशिश करने वाले संगठनों और व्यक्तियों को भी अलग-थलग किया जाना चाहिए। सम्मेलन में 78 देशों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। वास्तव में आतंकवाद के लिए गैरकानूनी तरीके से धन देने और भर्ती के लिए नई प्रकार की प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है।

पाकिस्तान व चीन जैसे देश आतंकवाद से लड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों को कमजोर और नष्ट करना चाहते हैं। सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि ऐसे तत्व तथा ऐसे देश अपने इरादों में कभी सफल न हो सकें। चूंकि यह सम्मेलन पिछले दो सम्मेलनों पेरिस (2018) और मेलबर्न (2019) के लाभों और सीखों पर आधारित है इसलिए आतंकवादियों को धन उपलब्ध कराने वालों के विरुद्ध वैश्विक सहयोग बढ़ाने की दिशा में कारगर साबित होगा।