विश्व शौचालय दिवस : दो अरब खर्च फिर भी 30,000 लोग खुले में जा रहे शौच

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Edited By Amrit Vichar
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स्वच्छ भारत मिशन को लेकर जिले में जागरूकता अभियान चला कर स्वच्छता के लिए प्रेरित किया

प्रत्येक घर में शौचालय की मुहिम और गांव को ओडीएफ घोषित किए जाने की जल्दबाजी में सचिवों और प्रधानों ने खेल कर शौचालयों का निर्माण शुरू कराया।

अमृत विचार, जूही दास। शासन ने जिन हाथों में ओडीएफ योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी थी, उन्हीं की लापरवाही से बड़ी संख्या में लोग खुले में शौच को जा रहे हैं। हालांकि चार साल पहले जिले को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है, वहां अभी भी ऐसे 30,000 परिवार ऐसे हैं जिनके घरों में शौचालय नहीं हैं। पीड़ितों व शासन के नुमाइंदों के विरोधाभासी दावे योजना की सफलता पर नए सिरे से सवाल खड़ा करने लगे हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य खुले में शौच से मुक्त करना था। प्रत्येक घर में शौचालय की मुहिम और गांव को ओडीएफ घोषित किए जाने की जल्दबाजी में सचिवों और प्रधानों ने खेल कर शौचालयों का निर्माण शुरू कराया। 12,000 की लागत से बनने वाले शौचालयों की गुणवत्ता से खेल कर जैसे-तैसे निर्माण पूरा कर दिया। लेकिन, इनमें से 30 प्रतिशत शौचालय ऐसे थे जो बनने के बाद से उपयोग करने लायक नहीं थे। 

सामुदायिक शौचालयों में ताला
खुले में शौच करने से रोकने के लिए 643 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया है। 50 करोड़ की लागत से 640 शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है। इनके संचालन के लिए स्वयं सहायता समूहों को भुगतान मिलता है। बावजूद इसके पंचायतों में 50 फीसदी सामुदायिक शौचालयों पर ताला बंद है।

जागरूकता नहीं होने से व्यवस्था ध्वस्त
स्वच्छ भारत मिशन को लेकर जिले में जागरूकता अभियान चला कर स्वच्छता के लिए प्रेरित किया। नुक्कड़ नाटक, वाल पेंटिंग व गोष्ठियों में पानी की तरह पैसा बहाया गया। लेकिन, निशुल्क शौचालय पाने की होड़ और भ्रष्टाचार के बीच जागरूकता अभियान ने दम तोड़ दिया। बड़ी संख्या में लोग खुले में शौच लाने को मजबूर हैं। 

कागजों में ओडीएफ 
शौचालय निर्माण के साथ जिले को ओडीएफ घोषित करने में भी अधिकारियों ने खेल किया। बड़ी संख्या में अधूरे शौचालयों के बावजूद 2019 में जिले को ओडीएफ घोषित करते हुए स्वच्छ भारत मिशन का गला घोंट दिया।

जिले में व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण जारी है। वर्ष 2022-23 में 11,424 शौचालय निर्माण का लक्ष्य था। अब तक 9,988 बने हैं।  पंचायतीराज विभाग के पोर्टल पर अब तक 30,000 से ज्यादा आवेदन मिले हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है। -आलोक प्रियदर्शी, डीपीआरओ

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