रानीखेत: पांडवों की शरणस्थली पांडवखोली सजने लगी
रानीखेत, अमृत विचार। पांडवों की अज्ञातवास में शरण स्थली रही पांडवखोली में मेले की तैयारियां इन दिनों जोर-शोर से चल रही है। दिसंबर के पहले सप्ताह से प्रारंभ होने वाले कार्यक्रमों को भव्य रूप देने के लिए पर्यटन सहित अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का खाका तैयार कर ऐतिहासिक मैदान भीम की खातड़ी के साथ ही हिमदर्शन, योगाभ्यास को बने हवाई टायर टावर सहित पाषाण प्रतिमाओं को रंग-रोगन से संवारने का काम प्रारंभ हो गया है।
पौराणिक द्वारिका की ऊंची चोटियों में शुमार तथा शक्तिपीठ मां दूनागिरी धाम से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित द्वापरयुगीन पांडवखोली में मेले की तैयारियां प्रारंभ हो गई है। 3 दिसंबर को स्वर्गपुरी महंत बलवंत गिरी की 29वीं पुण्यतिथि पर लगने वाले भंडारे की तैयारियां समिति द्वारा पूरी कर ली गई हैं।
पथ भ्रमण संघ अध्यक्ष हरीश लाल शाह ने बताया कि सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए सजाए गए इस धार्मिक मेले में पर्यटन विकास के लिए साहसिक कार्यक्रमों के अलावा ग्रामीणों के लिए चिकित्सा शिविर, पुरुष, महिलाओं व बच्चों की विभिन्न खेल गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। उन्होंने क्षेत्र की समस्त जनता से कार्यक्रम में भागीदारी की अपील की है।
