विश्व मात्स्यिकी दिवस : मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने मछुवारों को किया सम्मानित
अमृत विचार, लखनऊ। विश्व मात्स्यिकी दिवस के अवसर पर मत्स्य विभाग उत्तर प्रदेश ने लखनऊ के राष्ट्रीय मत्स्य अनुवांशिक संसाधन ब्यूरो तेलीबाग में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अन्तर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण,कार्यशाला और विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इस आयोजन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद ने किया।
इस दौरान उप्र मत्स्य जीवी सहकारी संघ लि के सभापति रमाकान्त निषाद, मत्स्य विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ रजनीश दुबे, एनबीएफजीआर के निदेशक प्रशांत शर्मा, एनएस रहमानी संयुक्त निदेशक मत्स्य, पुनीत कुमार उपनिदेशक मत्स्य समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा इस कार्यक्रम में मात्स्यिकी के क्षेत्र से जुड़ी प्रदर्शनी भी लगाई गई। जिसमें 18 कंपनियों द्वारा लगाए गए स्टॉल में मत्स्य पूरक आहार, आरएएस, बायोफ्लॉक, मत्स्य पालन में उपयोग होने वाली दवाईयां, जाल, आदि की प्रदर्शनी लगाई गई थी। वहीं कार्यक्रम में प्रदेशभर से 600 मत्स्य पालक और उद्यमियों ने प्रतिभाग किया।
वहीं कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए मत्स्य पालकों और उद्यमियों को मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना, निषादराज बोट योजना, मछुआ कल्याण फंड, मछुआ दुर्घटना बीमा योजना,किसान क्रेडिट कार्ड समेत कई योजनाओं की जानकारी दी गई। इस अवसर पर मत्स्य मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद ने मत्स्य व्यवसाय से जुड़े 30 मत्स्य पालकों और उद्यमियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इसके अलावा मत्स्य मंत्री ने 40 मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड और 110 मत्स्य पालकों को मछुआ दुर्घटना बीमा पत्र भी वितरित किया। वहीं प्रदर्शनी में लगी तीन सबसे अच्छी स्टॉल एसआर विज्ञान को प्रथम पुरस्कार, आरएस पॉलीमर को द्वितीय पुरस्कार और मेहरोत्रा एक्वेरियम को तृतीय पुरस्कार भी दिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मत्स्य मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना में अनुदान लेने हेतु वित्तीय वर्ष 2022-23 में लगभग 75 हजार आवेदकों ने आवेदन किया। जिसमें से लगभग 16 हजार आवेदकों को नियमानुसार अनुदान का लाभ दिया जायेगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि मात्स्यिकी के क्षेत्र में राजस्व की बढ़ोत्तरी हो रही है और इससे अधिकाधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उन्होने आगे कहा यह समय मत्स्य पालन को तकनीकी रूप से करने का है। अतः सभी मत्स्य पालक एन0बी0एफ0जी0आर0, संस्थान के वैज्ञानिकों से समन्वय स्थापित कर तकनीकी रूप से मत्स्य पालन करें तथा मछलियों के आधार कार्ड जिसे फिश टैगिंग कहा जाता है कि भी जानकारी प्राप्त करें। इसके अलावा उन्होंने मत्स्य व्यवसाय से जुड़कर स्वरोजगार के अवसर प्राप्त करने और आर्थिक उन्नति के लिए लोगों को प्रेरित किया।
