रोजगार के अवसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को प्रधानमंत्री रोजगार मेले के तहत 71 हजार से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान करने के कार्यक्रम की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी और यूक्रेन युद्ध के चलते पैदा हुई कठिन आर्थिक परिस्थितियों में विश्व में युवाओं के सामने नए अवसरों का संकट बना हुआ है लेकिन भारत में सरकारी और गैर-सरकारी, दोनों ही क्षेत्रों में नई नौकरियों की संभावना लगातार बढ़ रही है। आज भारत दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए हम आत्मनिर्भर भारत के रास्ते पर चल रहे हैं।
इससे पहले रोजगार मेले के तहत अक्टूबर में 75 हजार से अधिक नए भर्ती किए गए उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे। उधर विपक्ष कह रहा है कि सालाना दो करोड़ नौकरियों का वादा करने वाली सरकार केवल नियुक्ति पत्र बांटने के आयोजन कर रही है। सरकार खुद बता चुकी है कि पिछले आठ साल में 22 करोड़ युवाओं ने नौकरी के लिए फॉर्म भरे लेकिन नौकरी मिली मात्र सात लाख को।
सरकार का दावा है नौकरियां उपलब्ध कराने के लिए सरकार मिशन मोड में काम कर रही है। स्टार्ट-अप्स से लेकर स्वरोजगार तक, स्पेस से लेकर ड्रोन तक, आज भारत में युवाओं के लिए चौतरफा नए अवसरों का निर्माण हो रहा है। 10 लाख नियुक्तियों हेतु आयोजित ‘रोजगार मेला’ युवा शक्ति के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहा है। जानकारों के मुताबिक आज भारत सेवा निर्यात के मामले में विश्व की बड़ी ताकत बन गया है।
भारत दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग पावर हाउस बनने की राह पर है। मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल और स्थानीय को वैश्विक स्तर पर ले जाने जैसे अभियान रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि ये अवसर युवाओं के लिए उनके अपने शहरों और गांवों में उभर रहे हैं। इससे युवाओं का पलायन रुकेगा और वे अपने क्षेत्र के विकास में सार्थक भूमिका निभा पाएंगे।
वास्तव में सरकार के इन कदमों से युवाओं का हौसला बढ़ेगा और रोजगार के अनेक अवसर भी प्राप्त होंगे। युवाओं को अपनी भूमिका और कर्तव्यों को व्यापक रूप से समझना चाहिए और कर्तव्यों का पालन करने के लिए क्षमता निर्माण पर लगातार ध्यान देना चाहिए। इसमें दोराय नहीं है कि मौजूदा दौर में नौकरियों का स्वरुप तेजी से बदल रहा है और सरकार भी लगातार विभिन्न प्रकार की नौकरियों के अवसर पैदा कर रही है।
