चित्रकूट: हत्या के मामले में कोर्ट ने पिता-पुत्र समेत चार को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
चित्रकूट। राजापुर में 2006 में युवक हत्याकांड में कोर्ट ने पिता-पुत्र समेत चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक को चौबीस-चौबीस हजार रुपये अर्थदंड भी दिया। यह मामला तब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील सिंह ने बताया कि राजापुर थाने में मूल रूप से कर्वी निवासी भानुप्रताप शर्मा ने 13 अगस्त 2006 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 12 अगस्त की शाम वह अपने पुत्र शैलेंद्र प्रताप उर्फ बंटी के साथ राजापुर में अस्पताल गेट के बाहर पान की दुकान के पास खड़ा था।
बंटी तीरधुमाई निवासी घनश्याम द्विवेदी पुत्र रविशंकर से बातचीत कर रहा था। इस दौरान मोटरसाइकिलों से पांच लोग आए। एक पर गुड़ौली निवासी रामचरित, अर्की निवासी रामराज मिश्रा व राजापुर निवासी मुकेश कुमार केशरवानी पुत्र भइयालाल केशरवानी तथा दूसरी बाइक पर अर्की निवासी दीपू मिश्रा पुत्र रामराज व बच्चा अग्रवाल उर्फ सुभाष बैठे थे। इन लोगों ने आते ही उसके पुत्र शैलेंद्र प्रताप दीक्षित पर जान से मारने की नीयत से तीन फायर किए।
रामराज की चलाई हुई एक गोली शैलेंद्र के पेट में लगी। घायलावस्था में शैलेंद्र को राजापुर अस्पताल ले गए। वहां से रिफर होने पर प्रयागराज ले जाते समय रास्ते में ही शैलेंद्र की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। एक आरोपी रामचरित पांडेय की पत्रावली अलग होने के कारण शेष बचे चार आरोपियों के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार श्रीवास्तव ने बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुनाया।
धारा 147, 148 व 302 सपठित धारा 149 भा. दं. सं. के तहत दोषसिद्ध होने पर इनको आजीवन कारावास और प्रत्येक को चौबीस हजार रुपये अर्थदंड दिया। राजापुर का चर्चित मामला होने की वजह से फैसले की जानकारी लेने के लिए कोर्ट के बाहर भीड़ लगी रही।
न्यायालय परिसर में संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग की
पुलिस अधीक्षक अतुल शर्मा के निर्देश पर सुरक्षा प्रभारी न्यायालय परितोष दीक्षित ने एलआईयू उप निरीक्षक शिवसागर तिवारी के साथ न्यायालय परिसर में संदिग्ध वस्तुओं और व्यक्तियों की चेकिंग की गई। एलआईयू कर्मियों व एएस चेक टीम बांदा ने संयुक्त रूप से सघन चेकिंग की।
