बरेली: सुरक्षित सफर को दूधिया रोशनी और फॉग लाइट की मांग के साथ दाम भी बढ़े

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

ऑटो स्पेयर पार्ट्स की दुकानों पर दोपहिया वाहनों में लगवाई जा रही फॉग लाइट

बरेली, अमृत विचार। सर्दी शुरू होने के साथ सड़कों पर कोहरा भी दिखने लगा है। रात और तड़के कोहरे के आगोश में सड़कें लिपटी रहती हैं। इससे दुर्घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। दुर्घटनाओं से बचने के लिए सड़कों को घेरे कोहरे को चीरने वाली फॉग लाइटों की मांग बढ़ गई है।

ये भी पढ़ें-  बरेली: सपा छोड़कर अफजाल हुसैन ने साथियों के साथ कांग्रेस में हुए शामिल

दोपहिया वाहन और कारों में ज्यादातर लोग सर्दी में फॉग लाइटें लगवाते हैं। ये लाइट सड़क के अंधेरे को दूर करते हुए रास्ता सुगम बनाती है। नवंबर की शुरुआत से सुरक्षित सफर को देखते हुए बाइकों व कारों में तेज रोशनी व कोहरे को चीरने वाली फॉग लाइट की मांग अधिक है। इस संबंध में अमृत विचार टीम ने शहर के कई बाइक मैकेनिक और विक्रेताओं से बात की। वे कहते हैं कि पिछले वर्षाें के मुकाबले इन लाइटों के दामों में लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

राजमार्गों और राष्ट्रीय मार्गों पर सर्दियों में दुर्घटनाओं के खतरे को रोकने के लिए बाजार में कई प्रकार की फॉग लाइट का प्रचलन है। लाइटों की शुरुआत 250 से 4000 रुपये तक है, लेकिन इन सभी पर दूधिया रोशनी बिखेरने वाला स्नो व्हाइट बल्ब भी भारी पड़ रहा है। इस बल्ब की मांग भी अधिक है। स्नो व्हाइट बल्ब पीली रोशनी देने वाली फॉग लाइट्स से अधिक सड़क को साफ दिखाती है। कोहरे को चीरकर करीब 15 मीटर आगे तक रोड साफ नजर आती है। खराब मौसम में रोड पर चमक बिखेरने वाले स्नो व्हाइट बल्ब एक बार देख लिए तो लोग पीली लाइटों को भाव नहीं देते हैं।

स्नो व्हाइट बल्बों की मांग भी अधिक
ऑटो पार्ट्स विक्रेता सुनील ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के जिन लोगों को स्नो व्हाइट बल्बों की खूबियां पता नहीं, केवल वही लोग पीली रोशनी देने वाली फॉग लाइटें खरीदने में दिलचस्पी ले रहे हैं। शहर के लोग अत्याधुनिक टेक्नालॉजी वाले स्नो व्हाइट बल्बों की मांग कर रहे है, क्योंकि उन्हें दोपहिया वाहनों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इन बल्बों का हाई रिजोल्यूशन वाला रिफ्लेक्टर प्रकाश की तीव्रता को कई गुना बढ़ा देता है।

रिफ्लेक्टर की क्वालिटी पर रोशनी निर्भर
पटेल चौक पर ऑटो पार्ट्स की दुकान संचालक प्रदीप बताते हैं कि बल्ब का फिलामेंट उतनी ही रोशनी देता है जितनी उसकी वाट पॉवर होती है। प्रकाश की तीव्रता बल्ब में इस्तेमाल होने वाले रिफ्लेक्टर पर निर्भर होती है। पीली रोशनी वाली पारंपरिक फॉग लाइटों के परावर्तक उतने अच्छे नहीं हैं, जितने बेहतर स्नो व्हाइट बल्ब के साथ आ रहे हैं। पीली फॉग लाइट घने कोहरे में रास्ता नहीं दिखाती बल्कि सामने वाले वाहन चालकों को केवल सचेत करती है।

कोहरे में इस तरह चलाएं वाहन

  • वाहनों के आगे और पीछे रिफ्लेक्टर स्ट्रिप लगवाएं।
  • फॉग लाइट और तेज रोशनी वाले बल्ब जलाकर चलें।
  • स्पीड 25 से 30 किमी प्रति घंटा से ज्यादा न होनी चाहिए।
  • हाईवे पर सेंटर और साइड लाइनों को देखते हुए चलें।
  • आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

ये भी पढ़ें- बरेली: नए सत्र से आधुनिक मशीनों से प्रशिक्षित होंगे आईटीआई के अभ्यर्थी

संबंधित समाचार

टॉप न्यूज

कांवड़ यात्रा को लेकर लखनऊ में सख्ती, मुख्य मार्गों पर बंद रहेंगी नॉनवेज की दुकानें; FSDA करेगा खाद्य पदार्थों की जांच
CJP Protest: CJP का रुख बरकरार, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ स्वीकार नहीं, जानें CJP के प्रदर्शन पर क्या बोले RSS नेता इंद्रेश कुमार
लखनऊ में भोजपुरी अभिनेत्री ने दर्ज कराया साइबर फ्रॉड का केस, बेटी की AI से अश्लील वीडियो वायरल करने का आरोप 
हरदोई सड़क हादसा: तेज रफ्तार बनी जानलेवा, पेड़ से टकराई बाइक; किसान की दर्दनाक मौत
Parliament Monsoon Session Day 5: राज्यसभा में हंगामे के बाद कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित, CJP से बातचीत के लिए कंस्टीट्यूशन क्लब पहुंचे जेपी नड्डा