अयोध्या: कभी राम बनके, कभी श्याम बनके... राम राज्याभिषेक का हुआ मंचन
अमृत विचार अयोध्या। रामायण मेले के समापन पर रामलीला में राम राज्याभिषेक का मंचन किया गया। चौथे व अंतिम दिन प्रवचन सत्र की अध्यक्षता तन तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु विष्णुदेवाचार्य महराज ने व मंच संचालन समिति उपाध्यक्ष कमलेश सिंह ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे राम शरण दास रामायणी ने बताया की श्री राम के आदर्शों पर चलते हुए जीवन में पुण्य कर्म करना चाहिए। इससे पहले मंगलवार की शाम को सजे सांस्कृतिक मंच पर गायिका तृप्ति शाक्या ने धमाल मचा दिया। कभी राम बनके, कभी श्याम बनके की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रामायण मेला समिति द्वारा आयोजित 41वें रामायण मेले की तृतीय सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ समिति उपाध्यक्ष महंत जन्मेजय शरण ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में झुनझुनवाला डिग्री कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा राम कलेवा और सीता विदाई का अत्यंत मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया। मेजर योगेश दहिया द्वारा पुलवामा पर कविता प्रस्तुत की गई। लखनऊ से आए रिथम एकेडमी की सची द्विवेदी की टीम द्वारा लव कुश कांड का मंचन व लखनऊ से आए रमेश कुमार सुदर्शन और डॉ.प्रतिभा मिश्र ने अपनी प्रस्तुति दी। तृप्ति शक्या ने मेरा धर्मा तू मेरा कर्मा तू की प्रस्तुति पर दर्शक भाव विभोर दिखे। सांस्कृतिक संध्या में मुख्य रूप से समिति संयोजक आशीष मिश्र, कमलेश सिंह, नंद कुमार मिश्र (पेड़ा महराज) कमलेश सिंह, शिव नारायण सिंह समेत बड़ी संख्या में संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। डॉ.सुनीता शास्त्री,महंत जन्मेजय शरण, महंत सुरेश दास, सुरेंद्र पाल, नागा राम लखन दास आदि संत महंत मुख्य वक्ता सहित अनेक श्रोता उपस्थित रहे।
