मीराबाई चानू की अगुवाई में भारतीय भारोत्तोलक विश्व चैम्पियनशिप से शुरू करेंगे 2024 ओलंपिक की तैयारी 

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

पूर्व विश्व चैम्पियन मीराबाई के द्वारा इस प्रतियोगिता में अपनी अधिकतम भार सीमा को परखने की उम्मीद है

बगोटा। मीराबाई चानू की अगुवाई में भारतीय भारोत्तोलक सोमवार से शुरू हो रही विश्व चैम्पियनशिप में जब अपनी दावेदारी पेश करेंगे तो उनकी निगाहें 2024 में पेरिस में होने वाले ओलंपिक पर होगी। ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई, राष्ट्रमंडल खेलों की पदक विजेता एस बिंदियारानी देवी (59 किग्रा), अचिंता श्युली (73 किग्रा) और गुरदीप सिंह (109 किग्रा से अधिक) अगस्त में बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों के बाद पहली बार किसी प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिता में चुनौती पेश करेंगे। इन खिलाड़ियों का लक्ष्य पेरिस ओलंपिक का क्वालिफिकेशन हासिल करने के लिए जरूरी रैंकिंग अंक जुटाना होगा।

पूर्व विश्व चैम्पियन मीराबाई के द्वारा इस प्रतियोगिता में अपनी अधिकतम भार सीमा को परखने की उम्मीद है लेकिन मुख्य कोच विजय शर्मा चाहते हैं कि अन्य भारोत्तोलक इसमें अपने स्तर को ऊंचा उठाये  और कम से कम एक वर्ग (स्नैच , क्लीन एंव जर्क और कुल भार) में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।  उन्होंने कहा, इस टूर्नामेंट के लिए मेरी उम्मीद है कि मीराबाई के अलावा सभी को तीन श्रेणियों में से एक में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना चाहिए। इससे उनके खेल में सुधार आयेगा और उन्हें क्वालीफिकेशन में मदद मिलेगी। विजय शर्मा ने कहा, मीराबाई  के मामले में हम हर क्वालीफाइंग स्पर्धा में 200 किग्रा से अधिक का कुल भारत उठाना चाहेंगे ताकि ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर सके। मीराबाई का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 207 किग्रा (88 किग्रा+119 किग्रा) है। वह 2020 से स्नैच श्रेणी में 90 किग्रा के आंकड़े को पार करने की कोशिश कर रही है। 

ओलंपिक में हालांकि अभी समय है। उससे पहले सितंबर में होने वाले एशियाई खेल है। मणिपुर की यह खिलाड़ी पिछले कुछ समय से पीठ की समस्या से जूझ रही है जिससे स्नैच वर्ग में उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ है। इस बार की संभावना है कि वह इस स्पर्धा में 90 किग्रा का भार उठाने का जोखिम ना ले। मौजूदा समय में मीराबाई 49 किग्रा वर्ग में शीर्ष रैंकिंग की भारोत्तोलक है। इस स्पर्धा में उनके भार वर्ग में भाग ले रही सभी भारोत्तोलकों ने अपने शुरुआती प्रयास में 200 किग्रा या इससे अधिक का भार उठाना तय किया है। 

राष्ट्रमंडल खेलों में 55 किग्रा स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली बिंदियारानी 59 किग्रा भार वर्ग में चुनौती पेश करेंगी। इस वर्ग में बेहतर परिणामों के लिए टीम उसकी तकनीक में सुधार करने पर काम कर रही है। कोच ने कहा, ‘‘उसकी तकनीक इतनी अच्छी नहीं है, हमें पहले उस पर काम करना होगा। उसके पास ताकत है लेकिन तकनीक में सुधार करना होगा। बिंदियारानी को उनकी ‘एंट्री वेट’ के आधार पर ‘डी’ श्रेणी में रखा गया है। राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन श्युली (77 किग्रा), कांस्य पदक विजेता गुरदीप (109 किग्रा से अधिक) और ऋषिस्कनाटा को उनके संबंधित वर्गों में ‘सी’ श्रेणी में रखा गया है उनके पास पदक जीतने का कोई वास्तविक मौका नहीं है।

ये भी पढ़ें :  भारतीय दृष्टिबाधित क्रिकेटरों को बदलाव का इंतजार 

संबंधित समाचार