राइस मिल में बॉयलर का हिस्सा धंसा, दो मजदूर दबे, एक की मौत दूसरे की तलाश जारी
जींद। हरियाणा में जींद के हाट रोड स्थित राइस मील के बॉयलर का एक हिस्सा सोमवार को तड़के धंसने से दो मजदूर धंस गये, जिनमें से एक मजदूर की लाश निकाल ली गई है जबकि दूसरे की तलाश जारी है।
हादसे में तीन मजदूर सुरक्षित निकलने में कामयाब हो गए। पुलिस ने बताया कि रातपाली के कार्य के दौरान हादसे के समय बॉयलर पर पांच मजदूर काम कर रहे थे। अचानक ब्लास्ट के साथ बॉयलर के पश्चिमी छोर की ड्राईल मशीन का हिस्सा नीचे धंस गया। तीन मजदूर कूदकर बच निकलने में कामयाब हो गए जबकि मूल रूप से बिहार के बेगूसराय जिले का निवासी सूरज (24) तथा उसका साला नितिश (20) मलबे में दब गये।
सूचना पाकर एसडीएम सत्यवान मान, डीएसपी आशीष कुमार, जेसीबी तथा क्रेनों को लेकर मौके पर पहुंच गए और बचाव अभियान शुरू किया। लगभग छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से नितिश के शव को निकाल लिया गया। जबकि दूसरे मलबे के नीचे दबे सूरज की तलाश देर शाम तक जारी रही। रेस्क्यू अभियान में बड़ी बाधा भारी भरकम ब्वायलर रहा।
जिसमें सैंकडों क्विंटल धान भरी हुई थी। क्रेनों की सहायता से ब्वायलर के ऊपरी हिस्से को स्पॉट दी गई, जिसके बाद रेस्क्यू का कार्य शुरु हो सका। मिल प्रबंधन पर आरोप है कि हादसा रात को करीब तीन बजे हुआ था लेकिन सुबह नौ बजे तक किसी ने भी इस जानकारी प्रशासन व पुलिस को नहीं दी जबकि अगर समय रहते इसकी जानकारी अधिकारियों को मिल जाती तो मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी।
मिल प्रबंधन ने मिल के मुख्य द्वार ताला लगा दिया और बाहर से ऐसा लग रहा था कि यहां पर कुछ हुआ ही नहीं है। प्रशासन ने मिल के पीछे से जाकर बचाव अभियान शुरू किया। मिल प्रबंधन का कोई जिम्मेवार व्यक्ति मौके पर नहीं पहुंचा। मौके पर मिल मालिक के कुछ नुमाइंदे जरूर पहुंचे लेकिन वे कुछ कर पाने या बता पाने में बेबस नजर आ रहे थे और मिल के कर्मचारियों का सहयोग ना मिल पाने के कारण प्रशासन को बचाव कार्य में काफी दिक्कतें आई। मिल का मालिक विपिन कुमार नरेला, दिल्ली का निवासी बताया जाता है। मिल के सुपरवाइजर मोहम्मद फरहान ने कहा कि यह कुदरती हादसा है।
इससे आगे वे कुछ भी नहीं जानते। यह हादसा रात को करीब पौने तीन बजे हुआ है। वे सुबह ड्यूटी पर आए तो ही उन्हें इस हादसे का पता चला। मजदूर सूरज की शादी इसी साल फरवरी माह में नितिश की बहन से हुई थी। सूरज मिल में छह-सात माह से यहां कार्यरत था। वह चार बहनों पर इकलौता भाई था। अभी उसको निकाला नहीं जा सका है। वहीं नितिश नौ दिन ही पहले यहां पर काम करने के लिए आया था। वह दो भाई और चार बहनों में सबसे छोटा था।
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