बहराइच: कोर्ट के आदेश को भी नहीं मान रहे स्वास्थ्य अधिकारी, कर्मचारियों ने डीएम से लगाई गुहार, जानें मामला

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बहराइच। कोरोना महामारी में डूडा की ओर से मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। तीन माह कार्य कराने के बाद सभी कर्मियों को हटा दिया गया। लखनऊ हाई कोर्ट ने समायोजन के निर्देश दिए हैं। लेकिन मेडिकल कालेज प्रशासन के साथ मुख्य चिकित्साधिकारी कर्मियों का कहीं भी समायोजन नहीं दे रहे हैं। कर्मियों ने बृहस्पतिवार को डीएम से भी गुहार लगाई है।

जिले में कोरोना महामारी से निपटने के लिए डूडा विभाग की ओर से स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती एक वर्ष पूर्व की गई थी। 100 से अधिक सभी कर्मी काम कर रहे थे। इन सभी की तैनाती मेडिकल कॉलेज के साथ ही सीएचसी में भी किया गया था। लेकिन तीन माह काम कराने के बाद सभी कर्मियों को हटा दिया गया। इतना ही नहीं कर्मियों को पूरा वेतन भी नहीं दिया गया। इससे नाराज कर्मियों ने हाई कोर्ट की शरण ली। 

लखनऊ खंडपीठ ने 17 नवंबर को सुनवाई करते हुए 15 कर्मचारियों के तैनाती का आदेश स्वास्थ्य विभाग को दिया। निकाले गए पूर्व स्वास्थ्य कर्मी हिमांशु, आलोक श्रीवास्तव, विजय, पवन यादव, आलोक मौर्य, सुशील, निहारिका, प्रतिमा, कंचन प्रसाद, सरिता वर्मा और राजप्रीति मौर्य ने बताया कि कोर्ट के आदेश की कॉपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और सीएमएस को मिल गई है। सीएमओ को भी कॉपी भेज दी गई है। 

इसके बाद भी कर्मियों को तैनाती नहीं दी जा रही है। सभी का कहना है कि स्वास्थ्य अधिकारी जगह न होने की बात कह रहे हैं। राजप्रीती मौर्या ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग कहीं भी उनका समायोजन कर दे। जिससे सभी की बेरोजगारी दूर हो जाए। इस मामले में सीएमएस डॉ ओपी चौधरी ने बताया कि आर्डर की जानकारी है। लेकिन जगह न होने से समायोजन नहीं किया जा सकता है।

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