बरेली: अधिकारी मुफ्त में पी गए हजारों की चाय, वेंडर को बदलना पड़ा काम
बरेली,अमृत विचार। कोरोना काल में ट्रेनों का संचालन कम होने से बरेली जंक्शन के वेंडर भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कई वेंडर जंक्शन के अधिकारी और कर्मचारियों के सताने से भी परेशान हैं। एक वेंडर को सिर्फ इसलिए अपना काम बदलना पड़ गया। क्योंकि अधिकारियों ने उसकी मुफ्त में इतनी चाय पी कि …
बरेली,अमृत विचार। कोरोना काल में ट्रेनों का संचालन कम होने से बरेली जंक्शन के वेंडर भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कई वेंडर जंक्शन के अधिकारी और कर्मचारियों के सताने से भी परेशान हैं। एक वेंडर को सिर्फ इसलिए अपना काम बदलना पड़ गया। क्योंकि अधिकारियों ने उसकी मुफ्त में इतनी चाय पी कि उसे मोटा नुकसान उठाना पड़ा।
लाकडाउन से पहले मन कठोर करते वेंडर अधिकारी-कर्मचारियों को चाय मुफ्त में पिलाता रहा। अनलाक- 2 में वेंडर की हालत ज्यादा खराब हो गई। कहीं से चाय का रुपया नहीं मिला, तब परिवार का पालन करने के लिए वेंडर ने अपना काम बदल लिया। अब वह सिर्फ नमकीन, बिस्किट, पानी चीजें ही बेच रहा है।
जंक्शन पर करीब 150 वेंडर पंजीकृत हैं। उन्हें जंक्शन पर कारोबार करने के लिए सालाना किराया भी देना पड़ता है। नाम न छापने की शर्त पर वेंडर ने जंक्शन के अधिकारियों की पोल खोली। 165 सिविल लाइंस निवासी वेंडर ने बताया कि लाकडाउन से पहले जंक्शन के अधिकारियों ने उसके यहां से चाय मंगाई। मगर चाय का एक भी पैसा नहीं दिया। पहले दुकानदारी थोड़ी ठीक थी। इस वजह से अधिकारियों को मुफ्त में चाय पिला देता था।
मगर लाकडाउन के बाद यात्रियों की कमी हो गई। इससे चाय के ग्राहक भी कम हो गए। खुद का खर्चा निकालना मुश्किल हो गया। अधिकारियों से चाय पिलाने से उसे मोटा नुकसान हुआ है। इस वजह से उसे धंधा ही बदलना पड़ा। हालांकि, उसका कहना है कि पूरे जंक्शन पर सिर्फ मुख्य वाणिज्य निरीक्षक संजीव दुबे के ऑफिस में चाय नहीं गई। जब भी चाय गई, उन्होंने रुपये भिजवाए।
