Rukmini Ashtami 2022: रुक्मिणी अष्टमी पर बना शुभ संयोग, इन उपायों से देवी लक्ष्मी की होगी कृपा

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Edited By Amrit Vichar
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Rukmini Ashtami 2022 : रुक्मिणी अष्टमी पौष मास के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को मनाई जाती है। इस बार य‍ह शुक्रवार 16 दिसंबर को है। मान्‍यताओं के अनुसार इसी दिन द्वापर युग में देवी रुक्मिणी का जन्‍म हुआ था। देवी रुक्मिणी का विवाह भगवान कृष्‍ण से हुआ था और उन्‍हें मां लक्ष्‍मी का रूप भी माना जाता है। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्‍मी को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन रुक्मिणी अष्‍टमी होने से इसका धार्मिक महत्‍व और भी बढ़ गया है। रुक्मिणी अष्‍टमी पर इस बार कई अन्‍य शुभ योग भी बन रहे हैं जो कि धन प्राप्ति के लिए शुभ माने जा रहे हैं। 

कौन थीं देवी रुक्मिणी ?
देवी रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्‍मक की पुत्री थीं। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार भगवान विष्‍णु के अवतार श्री कृष्‍ण की पत्‍नी होने के कारण देवी रुक्मिणी को मां लक्ष्‍मी का रूप माना गया है। रुक्मिणी का भाई रुक्‍मी अपनी बहन का विवाह अपने मित्र शिशुपाल से करवान चाहता था, लेकिन रुक्मिणी भगवान कृष्‍ण से प्रेम करती थीं। इसलिए भगवान कृष्‍ण देवी रुक्मिणी का हरण करके उन्‍हें द्वारिका ले आए और वहां दोनों का विवाह हो गया।

रुक्मिणी अष्‍टमी पर बने हैं ये शुभ योग
रुक्मिणी अष्‍टमी इस बार शुक्रवार को होने के साथ ही इस दिन पौष संक्रांति भी है। यानी कि सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इसके अलावा इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ही लक्ष्‍मी नारायण नामक शुभ योग भी बन रहा है। इसलिए इस दिन संपूर्ण विधि-विधान के साथ मां लक्ष्‍मी की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से नए साल में मां लक्ष्‍मी की विशेष कृपा प्राप्‍त होती है।

रुक्मिणी संग श्रीकृष्‍ण की पूजा
रुक्मिणी अष्‍टमी के दिन देवी रुक्मिणी के साथ भगवान कृष्‍ण की पूजा करनी चाहिए। इस पंचामृत से भगवान कृष्‍ण और देवी रुक्मिणी का भोग लगाएं। मां लक्ष्‍मी को प्रसन्‍न करने के लिए इस दिन श्रीसूक्‍त का पाठ करना बहुत ही उत्‍तम माना जाता है। इसके साथ ही कनकधारा स्‍त्रोत का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

रुक्मिणी अष्‍टमी का व्रत
अगर आपके अंदर सामर्थ्‍य हो तो श्री प्राप्ति के लिए रुक्मिणी अष्‍टमी के दिन व्रत रखें और नमक न खाएं। इस दिन सिर्फ मीठा भोजन ही करें और किसी 6 वर्षीय कन्या को इस दिन शुद्ध सात्विक भोजन करवाएं। कन्‍या को भोजन करवाने के बाद अपनी सामर्थ्‍य के अनुसार उपहार देकर और उनका आशीर्वाद लेकर उन्‍हें विदा करें।

सुहागिन महिला को दें ये वस्‍तुएं
रुक्मिणी अष्‍टमी के दिन सुहागिन महिलाओं का आदर सत्‍कार जरूर करना चाहिए। इस दिन उन्हें मिठाई, वस्त्र, सुहाग सामग्री का दान दें। महिलाओं को मां लक्ष्‍मी का रूप माना जाता है। इस दिन किसी भी महिला को अपशब्‍द न बोलें और उनका आशीर्वाद लें।

देवी लक्ष्‍मी की आरती और पूजा
रुक्मिणी अष्‍टमी के दिन व्रत करने के बाद शाम की पूजा के वक्‍त पान के पत्ते पर कपूर और लौंग जलकर देवी रुक्मिणी और देवी लक्ष्मी की आरती करें। उसके बाद देवी लक्ष्‍मी को खीर, नारियल की बर्फी और बताशे का भोग लगाएं। इस दिन मां लक्ष्‍मी के चरणों में कमल का फूल अर्पित करना भी बहुत अच्‍छा माना जाता है।

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