नैनीताल: राज्य सरकार दे एसिड पीड़िता को 35 लाख रुपये मुआवजा
हाईकोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के पक्ष में दिया एतिहासिक आदेश
नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एसिड अटैक पीड़िता के पक्ष में एतिहासिक आदेश देते हुए राज्य सरकार को पीड़िता को 35 लाख रुपये का मुआवजा देने और उसके इलाज का संपूर्ण खर्च वहन करने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा की एकलपीठ में हुई।
मामले के अनुसार ऊधमसिंह नगर की जसपुर निवासी एसिड अटैक से पीड़ित युवती ने वर्ष 2019 में हाईकोर्ट में मुआवजा दिलाये जाने हेतु याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के मुताबिक, जब उस पर एसिड अटैक हुआ तब वह कक्षा 12 की छात्रा थी और बालिग भी नहीं हुई थी। उस दौरान एकतरफा प्यार में आरोपी ने, जिसका प्रेम प्रसंग उसके द्वारा लगातार ठुकराया गया था और बदले की भावना से उसने उस पर तेजाब से वार कर दिया गया था। इस अटैक में उसके शरीर का ऊपरी हिस्सा 60 प्रतिशत से भी ज्यादा झुलस गया था।
इसमें उसका चेहरा, शरीर का ऊपरी हिस्सा जिसमें हाथ भी शामिल हैं, गंभीर रूप से झुलस गया था। साथ ही दाहिना कान पूरी तरह बंद हो गया और दूसरे कान की 50 प्रतिशत सुनने की क्षमता भी चली गई थी।
पीड़िता ने सरकार से की थी 50 लाख रुपये की मांग
इस मामले में आरोपी को निचली अदालत ने वर्ष 2016 में दस साल का कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी। साथ ही हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 में पीड़िता को डेढ़ लाख रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति तत्काल देने के आदेश किये थे, परंतु पीड़िता ने इस जघन्य अपराध की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार से कराए जाने हेतु हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 50 लाख रुपये की मुआवजा राशि की मांग की थी ताकि वह सुरक्षित व सम्मान के साथ जीवन जी सके। पीड़िता की तरफ से कहा गया कि इस घटना से उसकी हंसती-खेलती जिंदगी पूरी तरह से बदरंग हो गयी है। उसके पास जीने का कोई जरिया नहीं है। शारीरिक रूप से अक्षम होने के साथ ही समाज में उसकी स्वीकार्यता कम हो गयी है। उसके उपचार में लाखों रुपये खर्च हो गये हैं। इस पर अंतिम सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से यह पक्ष रखा गया कि याची को इस हेतु सीधे हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बजाय अलग फोरम पर आवेदन देना चाहिए। सरकार द्वारा यह भी कहा गया कि एक ऐसे प्रकरण में लाभ देने से सभी लोग ऐसी प्रतिपूर्ति चाहेंगे।
याची की अधिवक्ता ने यह दिया तर्क
इसके जवाब में याची की अधिवक्ता स्निग्धा तिवारी द्वारा उच्च न्यायालय को बताया गया कि एक एसिड अटैक पीड़िता के मामले में उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा जबकि राजनीतिक मामलों में सरकार करोड़ों रुपये लुटा देती है। उनके द्वारा यह भी कहा गया कि एक पीड़िता के सम्मान को देखते हुए, उसे जीवन भर जिस तरीके से इस काले साए में रहना पड़ेगा, उसकी प्रतिपूर्ति की जानी चाहिए।
तर्कों के बाद यह फैसला
इन तर्कों के बाद हाईकोर्ट ने पीड़िता को 35 लाख रुपये मुआवजा देने व उसकी चिकित्सा और सर्जरी पर होने वाले व्यय का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट का यह आदेश कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी याचिका में पारित हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राज्य सरकार वर्ष 2020 में एसिड अटैक पीड़िताओं के लिये एक योजना लाई थी।
