भारतीय गणितज्ञों की मेधा अन्य देशों के मुुकाबले कहीं अधिकः प्रो.सुरेश चन्द्र रस्तोगी

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Edited By Ankit Yadav
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अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी में गणितज्ञों ने गणित के विभिन्न विधाओं पर की चर्चा

अमृत विचार, अयोध्या। डाॅ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के गणित एवं सांख्यिकी विभाग और इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ फिजीकल सांइसेज प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन रविवार को किया गया। इस दौरान समापन सत्र के मुख्य अतिथि नाइजीरिया विश्वविद्यालय के प्रो. सुरेश चन्द्र रस्तोगी ने ज्यामितीय विकास के बारे में बताते हुए एरियल स्पेस और उसके अनुप्रयोग पर विस्तृत चर्चा की।
 
उन्होंने कहा कि भारतीय गणित की मेधा अन्य देशों के मुुकाबले कहीं अधिक है। समुचित वातावरण के अभाव में इनकी उपादेयता प्रदर्शित नहीं हो पा रही है। वहीं अध्यक्षता करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकायाध्यक्ष प्रो. सीके मिश्र ने गणित के अनुप्रयोगों पर चर्चा की। इसके अलावा संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रथम तकनीकी सत्र में गणित के विभिन्न विधाओं पर चर्चा की गई। मान्टपेलियर विश्वविद्यालय फ्रांस के प्रो. एमएन बोयम ने बताया कि ज्यामितीय माॅडल का प्रयोग भौतिकी की विभिन्न विधाओं में किस तरह किया जा सकता है। प्रो. राकेश कुमार, डिपार्टमेन्ट आफ मैथमेटिक्स स्टेटिसटिक्स एण्ड एक्चूरिल साइन्स, नामीबिया यूनीवर्सिटी आफ साइन्स एण्ड टेक्लोनोजी, नामीबिया ने आपरेशन रिसर्च की प्रसिद्ध शाखा क्चीइगं थ्योरी एवं अप्लीकेशन्स पर व्याख्यान दिया। द्वितीय तकनीकी सत्र में भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी। बता दें कि दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय समागम में 125 से अधिक शोधार्थी व शिक्षकों ने अपना पंजीकरण कराया। वहीं  50 से अधिक शोधार्थी शिक्षकों ने शोध-पत्र पढ़ा।

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