सरकार की चिंता...
किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को देश की आबादी के कमजोर वर्गों की चिंता होनी चाहिए। तय करना चाहिए कि देश में किसी को भूखा न सोना पड़े, इसके लिए कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत की थी।
योजना की शुरुआत अप्रैल 2020 में तब की गई थी, जब कोरोना को बेकाबू होने से रोकने की कोशिशों के तहत देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। उस दौरान अचानक सारा कामकाज ठप हो जाने और आजीविका के साधन समाप्त हो जाने की वजह से देश में कमजोर तबकों के सामने जीवन निर्वाह की समस्या पैदा हो गई थी।
चूंकि कोरोना की समस्या जारी रही, इसलिए सरकार ने अप्रैल 2021 में फिर से यह योजना घोषित की। तब से इसे लगातार बढ़ाया जाता रहा। संभावना जताई जा रही थी कि सरकार इस योजना को लोकसभा चुनाव 2024 तक जारी रख सकती है। हाल ही में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को आगे न बढ़ा कर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और अंत्योदय योजना के तहत मिलने वाले अनाज के वितरण की अवधि एक साल और बढ़ा दी है। यानि देश के 81.35 करोड़ के लगभग लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्त खाद्यान्न देने का फैसला किया गया है। निस्संदेह इससे गरीबों को बड़ी राहत मिलेगी।
केंद्र सरकार अपने इस फैसले को 1 जनवरी 2023 से लागू करने जा रही है । सरकार का कहना है कि इस पर करीब दो लाख करोड़ रुपए का खर्च आएगा, जिसे सरकार वहन करेगी। इस योजना को मिला विस्तार खुद सरकार की प्राथमिकताओं पर कुछ सवाल तो खड़े कर ही गया है।
प्रधानमंत्री ने मुफ्त घोषणाओं को मुद्दा बनाया था और राजनीतिक दलों को इससे बचने की जरूरत बताई थी। ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि सरकार के इस फैसले के पीछे चुनावी हित हैं। ध्यान रहे, 2023 में राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे बड़े राज्यों के अलावा पूर्वोत्तर के त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने है। जम्मू कश्मीर में भी अगले वर्ष में ही विधानसभा चुनाव होने की संभावनाएं जताई जा रही है।
हालांकि गरीब लोगों के लिए अगले एक साल तक मुफ्त राशन की व्यवस्था कर केंद्र सरकार ने एक बड़ा काम कर किया है। लेकिन सवाल यह भी है कि सरकार इस तरह इतनी बड़ी आबादी को कब तक मुफ्त राशन उपलब्ध कराती रह सकती है। वैसे भी अगले वर्ष आबादी के पैमाने पर हम दुनिया का सबसे बड़ा देश बनने जा रहे हैं। समस्या से निपटने के लिए आवश्यक है कि हर जरुरतमंद को रोजगार मिले।
