मुरादाबाद : सरकारी चिकित्सा सेवा बेदम, स्वास्थ्य विभाग के खुद के कदम मजबूत नहीं...वेंटीलेटर पर अस्पताल

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Edited By Amrit Vichar
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अलविदा 2022 : नहीं मिले विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशिक्षुओं के भरोसे विभाग, कार्यवाहक संभाल रहे जिला पुरुष अस्पताल का प्रशासनिक कार्य

जिला अस्पताल परिसर में बना एमआरआई भवन।

विनोद श्रीवास्तव, अमृत विचार। मंडल मुख्यालय के जिला अस्पताल में कहीं संसाधनों का रोना है तो कहीं चिकित्सकों की कमी से विभाग सूना। विशेषज्ञ चिकित्सकों की राह देखते यह साल भी बीतने को है। किसी विभाग में मशीन न होने से भवन बेमतलब है तो चिकित्सक के न होने से बिना इलाज मरीज कई विभागों से लौट रहे हैं। जिले में स्वास्थ्य विभाग के खुद के कदम मजबूत नहीं हैं। अस्पताल खुद वेंटीलेटर पर हैं। 

40,000 लाख की आबादी वाले जिला मुख्यालय पर सरकारी चिकित्सा सेवा बेदम है। मंडल मुख्यालय होने के बाद भी यहां न तो सरकारी मेडिकल कॉलेज है और न निकट भविष्य में एम्स खुलने की उम्मीद दिख रही है। जबकि सरकार बेहतर चिकित्सा सेवा का दम भर रही है। जिला मुख्यालय पर सुविधाओं का रोना है तो ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की हालत और खस्ता है। 

पं. दीनदयाल उपाध्याय जिला पुरुष अस्पताल इस समय कार्यवाहक के भरोसे है। अपर निदेशक और प्रमुख अधीक्षक डॉ. एनके गुप्ता के 17 दिसंबर को निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य पद पर प्रोन्नत होकर लखनऊ जाने के बाद से अस्पताल कार्यवाहक के जिम्मे है। अस्पताल की वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी तिवारी के पास इस पद का प्रभार है। ऐसे में प्रशासनिक कार्य देखने में ही उनका अधिक समय बीत रहा है जिससे ओपीडी में आने वाले बच्चों की चिकित्सा राम भरोसे है। क्योंकि दूसरे बालरोग विशेषज्ञ भी चिकित्सा अधीक्षक का प्रशासनिक कार्य देखते हैं। ऐसे में मासूमों के इलाज में यहां व्यवस्था बेपटरी है।

जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार का कहना है कि चिकित्सकों की तैनाती शासन और स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर से होता है। एमआरआई भवन तैयार है। जैसे ही मशीन शासन से मिलेगी इसे संचालित कराया जाएगा। प्लास्टिक सर्जन पर किसी की तैनाती नहीं है।  

सेवानिवृत्त चिकित्सक संभाल रहे इन विभागों में मोर्चा
जिला अस्पताल में 30 जून को फिजिशियन डॉ. एनके मिश्र, नाक, कान, गला रोग विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अनिल कुमार अपनी अधिवर्षता आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो गए थे। सरकार दो महीने तक यहां चिकित्सक तैनात नहीं कर पाई तो महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य ने इन्हीं दोनों को बुलाकर पुनर्नियोजित कर दिया। इसके बाद इनके कंधे पर फिर से मरीजों के इलाज का भार है। जबकि इसके पहले चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. जेएल ममगई भी इसी श्रेणी में नियोजित होने से कार्य संभाल रहे हैं।

टीकाकरण में भी फिसड्डी है जिला, बैठकों में फटकार
जिले में चिकित्सा इंतजाम की खस्ताहाली तो है ही। नियमित टीकाकरण में भी पिछड़ना मुसीबत बना है। एक वर्ष तक के सिर्फ 63.95 फीसदी बच्चों को बीसीजी का टीका लगा है। जबकि पेंटावेलेंट व एमआर एक के टीकाकरण में भी फिसड्डी होने से प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में चिकित्साधिकारियों को सुधरने की चेतावनी मिल रही है। इससे साफ है कि जननी सुरक्षा, सुरक्षित मातृ व शिशु कल्याण कार्यक्रम जिले में वास्तविक कम कागजी अधिक हैं।

97 लाख के भवन को एमआरआई मशीन का इंतजार
जिला अस्पताल परिसर में ही 97 लाख रुपये की लागत से भवन बनकर तैयार होने और लोकार्पित होने के बाद भी आज तक एमआरआई मशीन नहीं आया। एमआरआई कक्ष भवन का 15 फरवरी 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकार्पण किया था और इसके साक्षी तत्कालीन पंचायती राज मंत्री और वर्तमान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी थे। इसके चलते एमआरआई कराने के लिए मरीजों को या तो यहां निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर 6000-7000 रुपये खर्च कर जेब कटवानी पड़ती है। नहीं तो सरकारी स्तर पर मेरठ, लखनऊ जाने की मजबूरी होती है। 

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