बरेली: ब्राजील मॉडल की तर्ज पर द्वारिकेश चीनी मिल में एथेनॉल का उत्पादन शुरू

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Edited By Amrit Vichar
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75 हजार क्विंटल है मिल की प्रतिदिन गन्ना पेराई की क्षमता

बरेली, अमृत विचार। चीनी उत्पादन में ब्राजील की तर्ज पर कवायद शुरू हो गई है। फरीदपुर स्थित द्वारिकेश चीनी मिल गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनाने लगी है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद मंडल का यह सबसे बड़ा प्लांट चालू हो गया है। यहां रोजाना होने वाले गन्ने की पेराई का एक चौथाई हिस्सा सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने के काम में आ रहा है।

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जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह ने बताया कि चीनी का उत्पादन अधिक होने और बाजार में मांग कम होने से मिल मालिकों को गन्ने का भुगतान करने में काफी दिक्कत उठानी पड़ती थी। इसको देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा अहम फैसले लिए गए और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एथेनॉल प्लांट लगाने की योजना बनाई गई। फरीदपुर चीनी मिल को शासन से मंजूरी मिली और लगभग 235 करोड़ रुपये की लागत से यह प्लांट बनकर तैयार हुआ। मिल की प्रतिदिन लगभग 75 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की क्षमता निर्धारित है।

गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनाया जा रहा
द्वारिकेश मिल के डिस्टलरी प्लांट में 25 हजार क्विंटल गन्ने के रस को सीधे एथेनॉल बनाया जा रहा है। मंडल में सबसे अधिक क्षमता वाला सुपर और हाईटेक सुविधाओं से लैस यह एथेनॉल प्लांट बताया जा रहा है। इस प्लांट से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड भी ड्राईआइस के रूप में इस प्लांट से उत्पादित हो रही है। जिसको बड़ी मात्रा में सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों के खरीदने की बात कही जा रही है।

कीमत और मांग बढ़ी
चीनी मिल के यूनिट हेड रविंद्र कुमार गुप्ता बताते हैं कि चीनी का उत्पादन कम होने से बाजार में भी सुधार हुआ है, लेकिन कीमत और मांग दोनों बढ़ने लगी हैं। अभी तक एक क्विंटल गन्ने से औसतन 12 किलो चीनी बनाई जा रही थी। जो कि विदेशों को निर्यात करने के बाद भी मिलों के पास मांग से ज्यादा स्टॉक में बच रही थी। इसकी वजह से किसानों का समय से भुगतान नहीं हो पा रहा था। अब शीरे से एथेनॉल बनाने के बाद उसे पेट्रोल, डीजल में मिलाया जा रहा है। पेट्रोल में एथेनॉल का प्रतिशत बढ़ने के बाद मांग में और इजाफा हुआ है। दूसरी ओर एथेनॉल की बाजार में डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है। पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल सस्ता भी रहता है।

पेट्रोल के विकल्प के रूप में यह कदम उठाया
पहले पेट्रोल में पांच प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की केंद्र सरकार से मंजूरी भारत की पेट्रोलियम कंपनियों को मिली थी। उसके बाद इसे बढ़ाकर आत्मनिर्भर भारत के रूप में एक कदम बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने इसे अब 20 प्रतिशत कर दिया है। पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों से लोगों को हो रही परेशानी को लेकर पेट्रोल के विकल्प के रूप में एथेनॉल बनाने का यह कारगर कदम उठाया गया है।

एथेनॉल बनने के ये होंगे फायदे
गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनने से आने वाले समय में मिल मांग के अनुरूप ही चीनी का उत्पादन करेगी। इससे मुनाफा ज्यादा होगा। उत्पादन होने के बाद चीनी की बिक्री समय से नहीं होने और पैसे नहीं मिल पाने की वजह से भुगतान अटक जाता है, लेकिन एथेनाल का पैसा तत्काल मिल जाएगा। पैसों से समय से किसानों का भुगतान भी हो जाएगा, इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। पर्यावरण में कुछ हद तक सुधार की बात कही जा रही है।

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