भारत की कोशिश
रूस-यूक्रेन संघर्ष गहरी चिंता का विषय है। शुरुआत से ही भारत की कोशिश रूस, यूक्रेन को बातचीत और कूटनीति पर वापस लाने की रही है। क्योंकि मतभेदों को हिंसा से नहीं सुलझाया जा सकता। युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा दबाव है और दुनिया में राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। ऐसे समय में भारत ने जी 20 की अध्यक्षता संभाली है। यह जिम्मेदारी संभालना बड़ी बात है।
रविवार को ऑस्ट्रिया में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने कहा कि भारत अध्यक्षता के दौरान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित को महत्व देगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में बड़े बदलाव के लिए जोर देना भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 77 साल पुराने संगठन को ‘नया रूप’ देने की आवश्यकता है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा यह नहीं मानता कि संयुक्त राष्ट्र निष्पक्षता से उसकी आवाज उठाता है। विदेश मंत्री की यह पहली ऑस्ट्रिया यात्रा है। जयशंकर की यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
विदेश मंत्री की यात्रा दोनों देशों के संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण कही जा सकती है। इस दौरान जो पांच समझौते हुए उनमें से दो ऑस्ट्रिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के हित में हैं। एक समझौता ‘माइग्रेशन एंड मोबिलिटी’ पर है जो उन लोगों के लिए है जो ऑस्ट्रिया में काम करना चाहते हैं और जो व्यापार के लिए भारत आना चाहते हैं, या जो यहां छात्रों और पेशेवरों के रूप में आते हैं। एक अन्य समझौता ‘वर्किंग हॉलिडे’ कार्यक्रम पर है जो ऑस्ट्रिया में भारतीय छात्रों को छह महीने तक काम करने में सक्षम बनाएगा।
ये समझौते द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने की दिशा में दोनों देशों की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं। पिछले तीन दिनों में दो देशों की यात्रा के दौरान विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि हमारी सीमाओं पर चुनौतियां हैं। चीन के साथ हमारे संबंधों की स्थिति सामान्य नहीं है। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। इसका अधिकांश हिस्सा चीन के साथ देश की उत्तरी सीमा पर सामने आने वाली तीव्र चुनौतियों के आसपास केंद्रित है।
पाकिस्तान के साथ सीमा पार से आतंकवाद की समस्या बनी हुई है। साथ ही दो टूक कहा कि कभी भी बातचीत के लिए आतंकवाद को हथियार बनने नहीं देंगे। हम वास्तविक नियंत्रण रेखा को एकतरफा बदलने के किसी भी प्रयास पर सहमत नहीं होंगे, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर हम दृढ़ हैं। यह यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों, भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय चुनौतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण कही जा सकती है।
