बरेली: लाइसेंस ही नहीं बनता, कई शूटरों पर भारी है ये सरकारी खेल
शिवांग पांडेय, बरेली, अमृत विचार। शस्त्र लाइसेंस बनने की प्रक्रिया वैसे ही कठिन है, निशानेबाजों के लिए इसमें और भी पेच फंसा दिए जाते हैं। नतीजा यह है कि राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पदक जीतने वाले तमाम निशानेबाजों को अभ्यास करने या प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए किराए की पिस्टल से काम चलाना पड़ रहा है। कई निशानेबाजों के लिए अपनी पिस्टल न होने के कारण अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना भी मुमकिन नहीं हो पा रहा है।
ये भी पढ़ें- बरेली: नए साल पर नैनीताल जाना पड़ा महंगा, नौ लाख की चोरी
शस्त्र लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया तमाम निशानेबाजों के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है। जिले में दो सौ से ज्यादा निशानेबाज शहर की विभिन्न निजी और राइफल क्लब में अभ्यास करते हैं। दस से ज्यादा निशानेबाज है लाइसेंस न बन पाने की वजह से अपनी पिस्टल नहीं खरीद पा रहे हैं। प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए उन्हें किराये पर पिस्टल लेकर काम चलाना पड़ता है। निशानेबाजों के अनुसार सरकारी नियमों के मुताबिक खिलाड़ियों काे लाइसेंस बनाने के लिए सहूलियत दी जानी चाहिए लेकिन कई पदक जीतने के बाद भी वे लाइसेंस के लिए सरकारी दफ्तरों चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। इससे उनका खेल भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
राष्ट्रीय निशानेबाज को साल भर से कटवा रहे हैं चक्कर
देवव्रत राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई पदक जीत चुके हैं। देवव्रत वर्ष 2006 से 2009 तक 25 मीटर इवेंट में .22 स्टैंडर्ड पिस्टल और .32 बोर सेंट्रल फायर पिस्टल के साथ 50 मीटर .22 फ्री पिस्टल इवेंट में लगातार मेडलिस्ट रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2021 से लाइसेंस के लिए आवेदन किया था लेकिन अब तक उनका लाइसेंस नहीं बन पाया है। वह इस वजह से ठीक से अभ्यास तक नहीं कर पाते।
देवव्रत ने बताया कि तत्कालीन डीएम नितीश कुमार ने निशानेबाजों को भरोसा दिलाया था कि उन्हें लाइसेंस बनवाने में कोई असुविधा नही होने देंगे, लेकिन कुछ समय बाद उनका ट्रांसफर हो गया। उनका लाइसेंस अब तक नहीं बना। अपने आवेदन में उन्होंने शूटिंग संबंधित सभी प्रमाण पत्र लगाए थे लेकिन फिर भी साल भर से चक्कर काट रहे हैं। अपनी पिस्टल न होने के कारण पिछले दो साल से वह किसी प्रतियोगिता में भी हिस्सा नहीं ले पाए हैं।
पिस्टल के इम्पोर्ट की स्वीकृति दे दी, लाइसेंस नहीं बनाया
निशानेबाज पीयूष प्रजापति ने बताया कि वह .22 पिस्टल, .32 सेंट्रल फायर पिस्टल के इवेंट में निशानेबाजी करते हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में कई बार पदक जीतकर बरेली का नाम रौशन किया लेकिन लाइसेंस न बनने की वजह से अपनी पिस्टल नहीं खरीद पाए। सभी आवश्यक मानकों को पूरा करने के साथ 2021 में आवेदन करने के बावजूद उन्हें लाइसेंस नहीं मिल पा रहा है। फिलहाल वह किराए की पिस्टल से अभ्यास कर रहे हैं। उनको पिस्टल इम्पोर्ट कराने की स्वीकृति मिल गई है, लेकिन लाइसेंस न बन पाने से वह अपना प्रदर्शन नहीं सुधार पा रहे है। आवेदन के बाद एक साल गुजर जाने के बाद भी उन्हें कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
निशानेबाजी में खिलाड़ियों के पास अपनी पिस्टल होना एक अहम जरूरत है वर्ना खिलाड़ी का प्रदर्शन प्रभावित होता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए निशानेबाज के पास अपनी पिस्टल होना अनिवार्य होता है। पिस्टल का लाइसेंस न मिलने से अक्सर राष्ट्रीय खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयनित नहीं हो पाते हैं। इससे निराशा के कारण उनका निशानेबाजी में रुझान कम होने लगता है। जिला प्रशासन की ओर से खिलाड़ियों को लाइसेंस बनाने में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। - अमित यादव, निशानेबाजी के कोच
ये भी पढ़ें- बरेली: जिलाधिकारी ने फतेहगंज पश्चिमी की रफियाबाद गौशाला का किया निरीक्षण
