बरेली: कम पानी वाले क्षेत्रों में ‘भुंगरू’ प्रणाली से लहलहाएगा गन्ना
महिपाल गंगवार, बरेली। कम पानी की उपलब्धता वाली जगहों पर बरसात के पानी को भूमि में रिचार्ज कर भुंगरू प्रणाली से गन्ने की खेती कराई जाएगी। फिलहार प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने इसका ट्रायलर शाहजहांपुर, गाजीपुर में शुरू किया है। बाद में प्रदेश के अन्य जिलों में इस प्रणाली को लागू किया जाएगा। बंजर, ऊसर, …
महिपाल गंगवार, बरेली। कम पानी की उपलब्धता वाली जगहों पर बरसात के पानी को भूमि में रिचार्ज कर भुंगरू प्रणाली से गन्ने की खेती कराई जाएगी। फिलहार प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने इसका ट्रायलर शाहजहांपुर, गाजीपुर में शुरू किया है। बाद में प्रदेश के अन्य जिलों में इस प्रणाली को लागू किया जाएगा।
बंजर, ऊसर, ढलान वाली जमीन पर भी इससे गन्ना उगाने का सपना पूरा किया जा सकता है। गुजरात में यह पैर्टन काफी प्रचलित है। इसको अब उत्तर प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। ट्रायल के तौर पर गन्ना शोध परिषद ने शहजहांपुर के उपकेंद्र अमहट, सुल्तानपुर और गाजीपुर में बारिश का पानी सहेजा जा रहा है।
प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी ने बताया कि ‘भुंगरू’ एक जल संरक्षण तकनीक है। इस तकनीक में बारिश में बेकार बह जाने वाले वानी को रिचार्ज किया जाता है। मानसून के दौरान बारिश के पानी का यह बेहतर सदुपयोग है। इससे बेकार पड़ी भूमि जहां पानी नहीं ठहरता और गन्ना नहीं उग सकता। वहां भी सिंचाई की जा सकती है। मोटर के माध्यम से पंद्रह फिट का पाइप डालकर संग्रहित जल का सिंचाई में प्रयोग किया जा सकेगा। गिरते भूजल स्तर को भी रोका जा सकेगा और बारिश के पानी से होने वाले नुकसान को भी बचाया जा सकेगा।
इन तरह होता है प्रोसेस
इस तकनीक में कंक्रीट का घेरा बनाकर बारिश का पानी को इकट्ठा रिचार्ज और संग्रहित किया जाता है। इसमें पंद्रह फिट का पाइन डाला जाता है। बाद में मोटर पम्प के माध्यम से इसे बाहर निकालकर सिंचाई में प्रयोग किया जा सकता है। ये तकनीक मानसून के दौरान होने वाले पानी के नुकसान को भी बचाती है। यह पद्धति परम्परागत रूप में गुजरात के कई क्षेत्रों में प्रचलित है। इस तकनीक का यूपी में फायदा लेने के लिए जिन स्थानों पर ट्रायल चल रहा है। वहां के परिणाम के बाद इसे व्यापक किया जाएगा।
