Kanpur Crime : पानी में तो नहीं बह गई हत्याकांडों की जांच, संजीत यादव, ऋतिक सिंह व सरताज बने पहेली

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Edited By Amrit Vichar
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Kanpur Crime कानपुर में हत्याकांडों की जांच एक पहेली बन गई।

Kanpur Crime कानपुर के संजीत यादव, ऋतिक सिंह व सरताज हत्याकांड पुलिस के लिये एक पहेली बन गई। पुलिस अभी तक इन तीनों के शवों को तलाश नहीं कर सकी।

कानपुर, अमृत विचार। Kanpur Crime पिछले तीन वर्षों में शहर के अलग-अलग थानाक्षेत्रों में हुए तीन हत्याकांड आज भी शवों के न मिलने से पहेली बनकर रह गए हैं। परिजनों का आरोप है कि पुलिस इतने वर्षों में तीनों के शवों कों नहीं तलाश कर सकी है।

मृतकों के परिजन आज भी टकटकी लगाए अपनों का इंतजार लगाए बैठें हैं। रो-रोकर अब तो परिजनों के आंसू भी सूख गए हैं। उनका कहना है कि लापरवाही से इन मामलों की जांच की जा रही है, जिससे जांच भी अब पानी में बहती नजर आ रही है।  

बर्रा पांच का संजीत यादव : 22 जून 2020 की रात बर्रा-5 निवासी लैब टेक्नीशियन संजीत यादव का अपहरण हो गया था और पिता चमनलाल को फोन कॉल करके 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। पुलिस के कहने पर संजीत के पिता रुपयों से भरा बैग लेकर फिरौती देने के लिए गए थे लेकिन अपहर्ता हत्थे नहीं चढ़े थे। बाद में पुलिस ने अंबेडकर नगर निवासी गिरोह के सरगना रामजी शुक्ल, दबौली वेस्ट निवासी ईशू उर्फ ज्ञानेंद्र, सरायमीता कच्ची बस्ती पनकी निवासी कुलदीप गोस्वामी, गज्जापुरवा निवासी नीलू सिंह, गुमटी नंबर पांच निवासी प्रीति शर्मा, सिम्मी सिंह उर्फ जयकरन फत्तेपुर रोशनाई अकबरपुर कानपुर देहात निवासी राजेश उर्फ चीता उर्फ टाइगर को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में संजीत का अपहरण करके रतनलाल नगर के एक मकान में रखे जाने और फिर हत्या करके शव पांडु नदी में फेंकने का पर्दाफाश किया था। लेकिन पुलिस ढाई साल बीतने के बाद भी संजीत का पता नहीं लगा सकी है। इस मामले में परिजनों की मांग पर सीबीआई जांच शुरु की गई थी, जिसकी भी कार्रवाई आजतक चलती ही चली आ रही है। इसी का  फायदा उठाकर कुछ माह बाद रामजी, ज्ञानेंद्र समेत आरोपितों को जमानत मिल गई थी। पुलिस ने रामजी शुक्ला को जिलाबदर घोषित कर दिया था और सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। 

ब्रह्मनगर का ऋतिक सिंह : 23 अगस्त 2022 को अटल घाट में क्या हुआ जो आजतक लोगों के लिए पहली बना हुआ है। ब्रम्हनगर निवासी अमर सिंह की खलासी लाइन में लक्ष्मी ज्वैलर्स के नाम पर बड़ा प्रतिष्ठान है। उनका इकलौता बेटा रितिक सिंह (22) सेना में अफसर बनने के लिए तैयारी कर रहा था। रोज की तरह वह गंगा बैराज पर साइकिंलिंग और रनिंग करने के लिए निकला था। लेकिन दोपहर तक घर नहीं लौटा तो परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने अनहोनी की आशंका जताते हुए बजरिया थाने में बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच शुरू की तो शाम तक पता चला कि रितिक सुबह 6:58 पर अटल घाट पर साइकिल से पहुंचा था। लेकिन इसके बाद लौटते हुए नहीं दिखा। जांच के दौरान घाट किनारे एक लोवर बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान भी वहां तैनात पुलिस कर्मी कुछ नहीं बता सके। उसका मोबाइल, जूता समेत अन्य सामान भी बरामद नहीं हुआ था। बजरिया थानाध्यक्ष विक्रम सिंह ने जांच के मुताबिक बच्चे की डूबने की आशंका जताई थी। क्यों कि वह घाट पर जाते तो दिखा है, लेकिन लौटते हुए नहीं। वह अकेले ही घाट पर साइकिल से पहुंचा था। इसके चलते उन्नाव, फतेहपुर और प्रयागराज तीन जिलो तक के थानों को सूचना दी गई थी। इसके साथ ही पीएसी लगाकर गंगा में कॉम्बिंग भी कराई गई थी। लेकिन कुछ सफलता हाथ नहीं लगी थी। अमर सिंह का बेटा एक्सिस कॉलेज से तीन वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा कर रहा था। वह सेना में अफसर बनने की चाह रखता था। इस मामले में पिता की तहरीर पर पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज करके मनीष, भिखारी कश्यप समेत चार युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कुछ माह पहले लखनऊ की विशेषज्ञों की टीम ने पहुंचकर क्राइम सीन दोहराया था, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ था।   

कैंट का सरताज : जाजमऊ में 2019 में टेनरी कर्मी सरताज की हत्या उसकी पहली प्रेमिका के पिता और दूसरी के चाचा ने मिलकर कर दी थी। आरोपियों ने उसके शव को सिद्धनाथ घाट पर गंगा में बहा दिया था। इस मामले में भी पुलिस शव नहीं तलाश कर सकी। इसके चलते हत्या में शामिल आरोपी जमानत पर बाहर चल रहे हैं। परिजन आज भी सरताज के लिए दरवाजे पर टकटकी लगाए इंतजार कर रहे हैं। उन लोगों का कहना है कि वह लोग कतई नहीं इस बात को मान रहे हैं, कि सरताज की हत्या हो चुकी है। वह लोग पुलिस पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगा रहे हैं। कहना है कि इस मामले में लापरवाही बरतते उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। 

सबूत की कमी बन रही वजह

कानपुर कोर्ट के कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मानें तो जिस तरह डकैती के बाद माल बरामद नहीं होता है, तो डकैती सिद्ध नहीं हो पाती है। उसी तरह शव बरामद न होने से कोई ठोस सुबूत पुलिस के पास नहीं होता है और इसका सीधा लाभ अपराधी को मिलता है। उसकी कम समय में न सिर्फ जमानत हो जाती है, बल्कि केस खत्म होने में भी मदद मिलती है। शव न मिलने से न तो पोस्टमार्टम हो पाता है और न ही इंजरीज सामने आ पाती हैं। शहर में इस तरह के कई मामले अभी पेंडिंग पड़े हैं।

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