बरेली: चिकित्सक बोले- कोरोना के साथ जीने की डालनी होगी आदत

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बरेली,अमृत विचार। अगस्त में कोरोना की रफ्तार बेकाबू हो सकती है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर 70 से 80 फीसदी लोग इससे संक्रमित हो जाएंगे तो एंटीबॉडी बनने के बाद यह वायरस इतना असरदार नहीं होगा। इस विषय में निजी चिकित्सकों ने बताया कि पहले हमें इस वायरस के साथ जीने की …

बरेली,अमृत विचार। अगस्त में कोरोना की रफ्तार बेकाबू हो सकती है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर 70 से 80 फीसदी लोग इससे संक्रमित हो जाएंगे तो एंटीबॉडी बनने के बाद यह वायरस इतना असरदार नहीं होगा। इस विषय में निजी चिकित्सकों ने बताया कि पहले हमें इस वायरस के साथ जीने की आदत डालनी होगी। साथ ही यह जरूरी नहीं कि यह वायरस इतना असरदार नहीं होगा। इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। एंटीबॉडी वाले को भी यह वायरस दोबारा अपने जाल में जकड़ लेता है।

पीलीभीत बाइपास रोड स्थित चंद्रलोक हॉस्पीटल के संचालक और आईएमए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. हिमांशु अग्रवाल बताते हैं कि कोरोना वायरस ने लोगों की जीवन शैली को भी बदलकर रख दिया है। यह वायरस शुरू से ही अपने रूप को बदल रहा है। ऐसे में यह कहना है कि 70 से 80 प्रतिशत लोगों की जब एंटीबॉडी हो जाएगी तो यह बेअसर हो जाएगा यह कहना गलत होगा। जनपद में जब से सैंपलों की संख्या बढ़ाई गई है तभी से मरीजों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है।

आईएमए के सचिव डा.राजीव गोयल ने बताया कि ऐसा देखने में आया है कि एंटीबॉडी टायटर कुछ ही महीनों में कम हो जाता है। तो ऐसे में कुछ ही महीने बाद संक्रमित मरीज को कोरोना होने के अधिक चांस अधिक रहते हैं। ऐसे में यह कह देना कि आने वाले समय में यह वायरस असरदार हो जाएगा यह कहना जल्दबाजी होगी। जब तक इसकी एंटीवायरल और वैक्सीन नहीं आ जाती है तब तक लेागों को इस वायरस के साथ ही जीवन जीना होगा। अभी तक कोरोना ने पैनडेमिक बन कर तबाही मचाई है। अब यही कोरोना एनडेमिक भी बन सकता है। एंटीवायरस और वैक्सीन आ जाने के बाद किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी। जल्द ही देश के वैज्ञानिक इस संबंध में खुशखबरी देने वाले हैं। तब तक हमें थोड़ा धीरज के साथ और बचाव के उपाय अपनाते हुए सुरक्षित रहने की जरूरत है।

खुशलोक हॉस्पीटल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. विनोद पागरानी ने बताया कि एनडेमिक उस हालत को कहते हैं, जिसमें एक वायरस इंसानों के साथ घूमता रहता है। उन लोगों पर असर डालता है। जिनके शरीर ने या तो इनसे लड़ने की क्षमता पैदा नहीं की है या फिर उन्हें इसकी वैक्सीन नहीं लगी है।

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