Mahoba: अधिवक्ता के साथ अभद्रता के विरोध में वकीलों ने किया हंगामा, महिला डॉक्टर, नर्स पर धक्का-मुक्की का लगाया आरोप
महोबा में अधिवक्ताओं ने हंगामा किया।
महोबा में अधिवक्ता के साथ अभद्रता के विरोध में अधिवक्ताओं ने हंगामा किया। आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में डॉक्टर द्वारा मांगे गये पैसे नहीं देने पर प्रसूता से धक्का मुक्की करने का आरोप लगाया।
महोबा, अमृत विचार। बहू को लेकर प्रसव कराने महिला जिला अस्पताल पहुंचे अधिवक्ता के साथ महिला डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ द्वारा अभद्रता व धक्का मुक्की किए जाने से नाराज अधिवक्ताओं ने मंगलवार को सीएमओ कार्यालय पहुंचकर जमकर हंगामा काटा।
अधिवक्ताओं ने ज्ञापन सौंपकर महिला डॉक्टर व अन्य स्टाफ के साथ कार्रवाई किए जाने की मांग की, साथ ही चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो अधिवक्ता शांत नहीं बैठेगे। सीएमओ ने जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
शहर के मुहल्ला सुभाषनगर निवासी अधिवक्ता प्रशांत कुमार वर्मा अपने छोटे भाई की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर महिला जिला अस्पताल लेकर सोमवार की रात को साढ़े नौ बजे पहुंचा। जहां पर मौजूद डॉक्टर अमृता सिंह पटेल और नर्स कल्पना पाल ने प्रसव करने से मना कर दिया।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि डॉक्टर और नर्स कल्पना पाल ने प्रसव कराने के नाम पर दस हजार रुपये की मांग की। जिस पर प्रशांत कुमार ने बताया कि वह एक अधिवक्ता हैं और सरकारी अस्पताल में कोई पैसा नहीं लगता है। इस पर डॉक्टर भड़क उठी और स्टाफ व अपने पति सहित अन्य लोगों को बुला लिया, जिन्होंने अभद्रता करते हुए धक्का मुक्की करते हुए अस्पताल से भगा दिया।
इसकी शिकायत अधिवक्ता प्रशांत कुमार वर्मा ने वार एसोसिएशन से की। इसे गंभीरता से लेते हुए अधिवक्ता एकजुट होकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे जहां पर अधिवक्ताओं ने महिला डॉक्टर और नर्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा काटा।
सीएमओ को शिकायती पत्र देकर डॉक्टर और नर्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कार्रवाई न होने पर शांत न बैठने की चेतावनी दी। डॉक्टर और नर्स की इस तरह से की जा रही तानाशाही पर आक्रोश जताते हुए उच्चाधिकारियों से शिकायत किए जाने की मांग की है।
महिला अस्पताल में सुविधा शुल्क की मांग को लेकर होता रहता है विवाद
महिला जिला अस्पताल में मरीजों और स्टाफ के बीच आएदिन सुविधा शुल्क की मांग को विवाद होता रहता है। इसकी कई बार शिकायत जिलाधिकारी से भी पीड़ितों ने की है। मनीष तिवारी नाम के एक समाजसेवी की गरीब महिला का प्रसव न कराने पर महिला डॉक्टर और कर्मचारियों से नोंकझोक तक हो चुकी है।
बताया जाता है कि जिला महिला अस्पताल में ज्यादातर प्रसव कराने आने वाली महिलाओं के परिजनों से सुविधा शुल्क की मांग की जाती है, सुविधा शुल्क न देने पर महिला जिला अस्पताल से मरीजों को बाहर भेज दिया जाता है, जिससे प्रसव कराने वाली महिलाओं को भारी दिक्कत का सामान करना पड़ता है।
