बरेली: जंगली लाल मुर्गियों की जीनोम का अध्ययन करेंगे सीएआरआई के वैज्ञानिक

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Edited By Amrit Vichar
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देश में पहली हो रही व्होल जीनोम सीक्वेंसिंग, एकत्र डेटा अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचेगा

बरेली, अमृत विचार। व्यवसायिक मुर्गियों की जनक कही जाने वाली जंगली लाल मुर्गी के संरक्षण की दिशा में केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) के वैज्ञानिकों की ओर से कदम उठाया गया है। इस प्रजाति की मुर्गियों के जीनोम सीक्वेंसिंग की जाएगी। इसके लिए सीएआरआई को इस साल प्रोजेक्ट मिला है। इस प्रोजेक्ट में इंटरनेशनल लाइवस्टॉक रिसर्च इंस्टीट्यूट, सीएआरआई के समन्वय से वर्ष 2026 तक अध्ययन किया जाएगा। जंगली मुर्गियों में व्होल जीन सीक्वेंसिंग देश में पहली बार होगी। जिससे लाल मुर्गियों का डेटा अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचेगा।

संस्थान की प्रधान वैज्ञानिक व प्रोजेक्ट लीडर डा. सिम्मी तोमर ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत एशिया महाद्वीप में पाई जाने वाली जंगली लाल मुर्गी के जीन का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए देश के विभिन्न वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में मौजूद जंगली लाल मुर्गियों का सैंपल लिया जाएगा। इसके तहत विभिन्न जलवायु परिस्थिति में इसके व्यवहार में कारक, रोग प्रतिरोध क्षमता व जलवायु में हो रहे परिवर्तन से उच्च तापमान के जीन समेत अन्य विशेषताओं के लिए आवश्यक जीन के बारे में जानकारी एकत्र की जाएगी। 

मुर्गी की जीनोम सीक्वेंसिंग से उनके संरक्षण करने में अहम भूमिका रहेगी। भविष्य में नई प्रजातियों के निर्माण में ये जीन संरचना का प्रयोग करने से उनमें जंगली लाल मुर्गियों की कई विशेषताएं सम्मलित हो सकेंगी। इस प्रोजेक्ट के सीएआरआई के निदेशक डा. एके तिवारी की अहम भूमिका है। वहीं, संस्थान के डा. जयदीप रोकड़े, आईवीआरआई के डा. रवि, डा. अखिलेश मिश्रा का भी सहयोग रहेगा।

हड़प्पा व मोहनजोदड़ों में भी मिले थे जंगली लाल मुर्गी के अवशेष
डा. सिम्मी तोमर के अनुसार जंगली लाल मुर्गी को सभी मुर्गियों का पूर्वज कहा जाता है। विभिन्न किताबों व अध्ययन में ये पाया गया है कि हड़प्पा व मोहनजोदड़ों से इस प्रजाति की मुर्गियों के अवशेष मिले हैं। इस प्रजाति की मुर्गी से ही अन्य मुर्गियों की प्रजातियों का विकास हुआ है। वहीं, अध्ययन के बाद वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में संरक्षण के लिए भी मानक तैयार कर उन्हें संरक्षित किया जा सकेगा।

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