जोशीमठ के बाद कर्णप्रयाग शहर पर संकट, आठ मकानों को खाली करने का नोटिस जारी

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Edited By Amrit Vichar
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जोशीमठ, अमृत विचार। जोशीमठ के बाद अब कर्णप्रयाग शहर खतरे की जद में आ गया है। पिछले दिनों यहां कुछ मकानों में आई दरारों के बाद अब प्रशासन ने अहतियात के तौर पर आठ मकानों को खाली करने का नोटिस जारी कर दिया है। प्रशासन के नोटिस के बाद प्रभावित लोग परेशान हैं। कर्णप्रयाग में भी दहशत का माहौल है। उपजिलाधिकारी चमोली ने इस नोटिस को जारी किया है। 
प्रशासन का कहना है कि अहतियात और भविष्य में किसी बड़े खतरे को देखते हुए आठ भवनों को खाली करने का नोटिस दिया गया है। प्रशासन और कर्णप्रयाग नगर पालिका के अधिकारी यथास्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। 
बहुगुणा नगर में बने लगभग 100 मकानों में से आधे मकानों में दरारें हैं। वर्ष 2013 के आसपास शुरू हुई जमीन धंसने की घटनाओं और दरारों के लिए स्थानीय लोग अनियोजित विकास को जिम्मेदार मान रहे हैं, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण, मंडी परिषद की संरचनाओं के निर्माण के दौरान सावधानी न बरतना, बरसाती पानी की निकासी को व्यवस्थित न करना तथा पिंडर नदी का कटाव शामिल है। 
कर्णप्रयाग नगरपालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुभाष गैरोला ने बताया कि वर्ष 2015 में भारी बारिश के चलते बहुगुणा नगर की ऊपर की पहाड़ी से भूस्खलन हुआ था जिसके मलबे से इस इलाके में नुकसान की शुरुआत हुई।

उन्होंने बताया कि उस दौरान नगरपालिका की ओर से स्थिति सुधारने के प्रयास किए गए थे जिसके बाद वह कई सालों तक ठीक भी रहा। हालांकि, इस बीच राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण, कर्ण प्रयाग-कनखूल सड़क की नाली न बनने और जल निकासी की सही व्यवस्था न होने से ऊपरी भाग में स्थित मकान भूधंसाव की चपेट में आ गए हैं और जमीन असुरक्षित होती जा रही है।

पिंडर और अलकनंदा नदी से लगातार हो रहा कटाव
पिंडर और अलकनंदा के तट पर बसे कर्णप्रयाग के बहुगुणा नगर में नीचे कुछ दूरी पर पिंडर नदी बहती है और हर बारिश में यह तट की मिट्टी काट कर ले जाती है जिसका असर बस्ती पर जमीन धंसने के रूप में दिखाई दे रहा है।

सुभाष गैरोला ने बताया कि ऐसी ही हालत अपर बाजार के इलाके की भी है जहां मुख्य बाजार से कर्णप्रयाग बाइपास तक कई दर्जन मकान भूस्खलन के मुहाने पर हैं। प्रभावितों को तात्कालिक राहत दिए जाने की मांग करते हुए गैरोला ने कहा कि सरकार को इसके बचाव के लिए दीर्घकालिक योजना बनानी चाहिए जिनमें नदी के किनारे सुरक्षा दीवार तथा जल निकासी की व्यवस्था शामिल है।  

 

 

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