संभल: नोडल अधिकारी ने किया गोशालाओं का निरीक्षण, रजपुरा में सांडों के लिए बनेगी गोशाला

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असमोली और पंवासा क्षेत्र की गोशालाओं में परखीं व्यवस्थाएं

संभल/सौंधन/ओबरी, अमृत विचार। शासन से नामित नोडल अधिकारी गिरजेश कुमार त्यागी ने विकास खंड पंवासा और असमोली क्षेत्र में दो गोशालाओं का निरीक्षण किया। गोवंश के लिए व्यवस्थाएं परखीं। गोवंश को गुड़ भी खिलाया। उन्होंने गोवंश खासकर सांडों को संरक्षित करने के लिए रजपुरा क्षेत्र में गोशाला का निर्माण कराने की बात कही। 

नोडल अधिकारी विशेष सचिव उच्च शिक्षा गिरजेश कुमार त्यागी मंगलवार को सीडीओ कमलेश सचान, सीवीओ डॉ. मुन्ना लाल, बीडीओ पंवासा रिजवान हुसैन के साथ कैला देवी में स्थित गोशाला पहुंचे। उनको निरीक्षण में गोवंश पशुओं के लिए व्यवस्था सही मिली। उन्होंने पानी, भूसा, हरा चारा तथा ठंड से बचाव के इंतजाम देखे। गायों को गुड़ खिलाया। गोवंश की देखभाल की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए अधिकारियों तथा प्रधान को निर्देश दिए। कहा कि किसानों को छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने के लिए विकास खंड रजपुरा के गांव मौलनपुर डांडा में गोशाला का निर्माण होगा।

 जहां सांडों को रखा जाएगा। नोडल अधिकारी ने विकास खंड असमोली की ग्राम पंचायत घंसूरपुर में गोशाला का निरीक्षण किया। गोवंश को बांधने की व्यवस्था देखकर सराहना की। गोवंश के स्वास्थ्य को अच्छा बताया। पशुओं के लिए गन्ना और गन्ने का अगोला के बारे में जानकारी की तो सीवीओ ने कहा कि सर्दी में पशुओं के लिए यह चारा अच्छा रहता है। नोडल अधिकारी ने बीडीओ कमलकांत सिंह, एडीओ पंचायत सुनील कुमार सिंह, सचिव अशोक कुमार, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपाक्षी से पशुओं के पार्क के बारे में जानकारी ली। पूछा कि केंचुआ द्वारा वर्मी कंपोस्ट खाद बनाया जा रहा है या नहीं। वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने की जगह को भी देखा। गोशाला में व्यवस्था ठीक मिली।

 पशुओं को छोड़ने वालों पर लगेगा 15,000 रुपये का जुर्माना
संभल। नोडल अधिकारी ने कहा कि अगर कोई किसान पशु को गोशाला में छोड़ रहा है या लावारिस छोड़ रहा है तो उसपर 10 से 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस संबंध में शासन में प्रस्ताव रखा जाएगा। यह भी कहा कि प्रति पशु 30 रुपये कम है। जिससे शासन को अवगत कराएंगे। नोडल अधिकारी गिरजेश कुमार त्यागी ने कहा कि किसानों को जागरुक होना चाहिए। जब तक पशु दूध देता है तो लाभ लेते हैं। बाद में उसे छोड़ देते हैं। यह प्रथा बदलनी चाहिए। जिस पशु से लाभ ले रहे हैं उसे बुजुर्ग अवस्था में नहीं छोड़ना चाहिए। बुजुर्ग पशु का गोबर इत्यादि भी घाटे का सौदा नहीं है। सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पशु निराश्रित रूप से सड़क पर न रहे क्योंकि किसानों की फसलों को भी नुकसान होता है। पशुओं को संरक्षित करने के लिए प्रयास जारी हैं।

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