महिला शिक्षा और रोजगार

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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भारत दुनिया की सुपर पॉवर बनने के लिए तेजी से प्रगति कर रहा है, परंतु लैंगिक असमानता की चुनौती आज भी हमारे समक्ष कठोर वास्तविकता के रूप में खड़ी है। देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

भारत जैसे विकासशील देश में महिलाएं लगभग सभी क्षेत्रों में भेदभावों का सामना करती हैं और सदियों पुरानी पितृसत्तात्मक व्यवस्था और परंपराओं ने महिलाओं के जीवन में और अधिक बाधाएं खड़ी की हैं। महिलाओं को पुरुषों के बराबर सामाजिक दर्जा नहीं दिया जाता है और उन्हें घर की चहारदीवारी तक सीमित कर दिया जाता है।

हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में स्थिति अच्छी है, परंतु इस तथ्य से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि आज भी देश की अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। उधर देश साक्षरता और महिला-शिक्षा के मुद्दे पर तेजी से प्रगति कर रहा है। फिर भी महिला शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, उससे यह सवाल उठता है कि क्या वाकई में महिलाएं सशक्त हो रही हैं।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में महिला साक्षरता दर मात्र 64.46 फीसदी है, जबकि पुरुष साक्षरता दर 82.14 फीसदी है।

उल्लेखनीय है कि भारत की महिला साक्षरता दर विश्व के औसत 79.7 प्रतिशत से काफी कम है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2010 और 2020 के बीच भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या 24 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गई। इसी तरह ऑक्सफैम इंडिया के इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट, 2020 के अनुसार, पुरुषों के समान शैक्षणिक योग्यता और अनुभव होने के बावजूद भारत में महिलाओं को नियोक्ताओं और समाज के पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है।

चूंकि ज्यादातर कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव होता है, इसलिए महिलाएं अधिकांशतः स्वरोज़गार के उपाय को चुनती हैं। महिलाओं की श्रम बाजार में भागीदारी बढ़ाने के लिए ज़रूरी है कि कार्यस्थल महिलाओं के अनुकूल हों। महिलाओं को शिक्षित करना भारत में कई सामाजिक बुराइयों और कार्यस्थल पर उत्पीड़न आदि को दूर करने की कुंजी साबित हो सकती है।

सरकार के स्तर पर, एक लैंगिक रूप से समावेशी रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से महिलाओं को आगे लाने और बड़े स्तर पर उन्हें रोज़गार के अवसरों का लाभ उठाने में सहयोग किया जा सकता है। यह निश्चित तौर पर देश के आर्थिक विकास में भी सहायक होगा, क्योंकि अधिक-से-अधिक शिक्षित महिलाएं देश के श्रम बल में हिस्सा ले पाएंगी।