मुरादाबाद में ड्रेस कोड का विरोध, बुर्के में हिंदू कॉलेज पहुंचीं छात्राओं को गेट पर रोका

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Edited By Amrit Vichar
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समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन, प्राचार्य बोले-छात्र-छात्राओं की सुविधा को लागू किया है ड्रेस कोड

मुरादाबाद, अमृत विचार। बुर्के में हिंदू कालेज पहुंची छात्राओं को गेट पर रोक दिया गया। प्रबंधन के फैसले से गुस्साई छात्राओं ने हंगामा किया। बाद में समाजवादी छात्र सभा के पदाधिकारियों ने कालेज में प्रदर्शन कर विरोध जताया और ज्ञापन देकर बुर्के में छात्राओं को प्रवेश देने की मांग की गई।

अराजक तत्वों पर नकेल कसने के लिए हिन्दू कालेज प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाया है। कालेज में छात्र-छात्राओं के लिए यूनिफार्म अनिवार्य की गई है। जनवरी से ड्रेस कोड का अनुपालन कराया जा रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं बिना यूनिफार्म के ही कालेज पहुंच रहे थे। सोमवार से सख्ती करते हुए बिना यूनिफार्म के कालेज आने वाले छात्र-छात्राओं के महाविद्यालय में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

प्रबंधन का मानना है कि यूनिफार्म अनिवार्य करने से बाहरी लोगों के प्रवेश पर लगाम लगी है। लेकिन, बुधवार को ड्र्रेस के मामले ने तूल पकड़ लिया। कुछ छात्राएं बुर्का पहनकर कालेज पहुंचीं तो गेट पर उपस्थित नियंता दल के सदस्यों उन्हें रोक दिया। छात्राओं से ड्रेस में आने के लिए कहा तो वह विरोध करने लगीं। इस दौरान महिला प्रोफेसर ने उनसे बिना बुर्का के केवल ड्रेस में आने के लिए कहा तो वह हंगामा करने लगीं। हालांकि कालेज में चेंजिंग रूम की व्यवस्था है, लेकिन छात्राएं बुर्के में कालेज में प्रवेश पर अड़ी थीं।

हिन्दू कॉलेज में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है। सियासी रूप देने की कोशिश की जा रही है। बुर्के में छात्राएं अंदर जाएंगी तो ड्रेस कोड के मायने ही क्या रह जाएंगे। उनकी सुविधा के लिए कॉलेज परिसर में चेंजिंग रूम बनाया गया है। इसके अलावा आवश्यक कार्य होने पर दो बजे के बाद प्रवेश की अनुमति है। फार्म जमा करने के लिए गेट पर व्यवस्था की गई है। अनुशासन और छात्र-छात्राओं की सुविधा को ही कालेज में यूनिफार्म को अनिवार्य किया गया है। -डॉ. सत्यव्रत सिंह रावत, प्राचार्य हिन्दू कॉले

क्या बोलीं छात्राएं?
वह बुर्का पहनकर कालेज आएंगी। नियंता दल ने चीफ प्राक्टर को बुलाने के साथ ही उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद छात्राएं कालेज मुख्य गेट के अंदर बने दूसरे गेट पर जाकर धरने पर बैठ गईं। - इरम परवीन, छात्रा

-बुर्का हमारे मजहब में है। इसे पहनना उनका अधिकार है और से उन्हें कोई वंचित नहीं कर सकता । कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। जोकि निंदनीय है। इसका वह विरोध करती रहेंगी।- इकरा, छात्रा

सपा छात्रसभा ने सौंपा ज्ञापन
समाजवादी छात्र सभा के जिलाध्यक्ष असलम चौधरी ने बताया कि छात्राओं को कॉलेज परिसर में आने से पहले बुर्का सड़क पर उतारना पड़ता है। इससे उन्हें असहजता महसूस होती है। उन्होंने कहा कि यदि बुर्के पर पाबंदी लगती है तो बड़ी संख्या में छात्राओं की संख्या घट जाएगी। उन्होंने प्राचार्य से छात्राओं को बुर्के में कालेज में प्रवेश दिए जाने की मांग की।

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